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ये दुर्लभ बीमारी इस 6-साल के मासूम बच्चे के दिमाग को सुन्न कर सकती है


"जब भी मैं विराट से बात करती हूँ  या उसे  पुकारती  हूँ  तो वह मुश्किल से कभी जवाब देता है / मुझे लगता था कि वह धीरे-धीरे समझने लग जाएगा लेकिन मैं गलत थी ।  जब डॉक्टरों ने मुझे उसकी बिमारी  के बारे में बताया तो मैं हैरान रह गई। वह आसान से आसान बातें  भी नहीं समझ पाता है। अगर मैं किसी शब्द को बार-बार बोलती हूँ तो वह बुरी  तरह से  रोना शुरू कर देता है। मुझे डर है कि वह अब कभी भी दूसरे बच्चों की तरह एक हँसती खेलती ज़िन्दगी नहीं जी पाएगा।”  हिरकोर, विराट की माँ|  



विराट एक जानलेवा बिमारी से पीड़ित है जो कि उसके माता-पिता शायद ही समझ सकें।  एक साल पहले तक विराट हँसता-खेलता एक आम बच्चा था। परिवार में सबसे छोटा होने के नाते सब उसे बहुत प्यार करते थे, खासकर उसकी बड़ी बहनें। वे उसके बिना जीवन जीने की सोच भी नहीं सकती  हैं।

अचानक, विराट को बार बार बुखार आने लगा जिसकी वजह से वह अत्याधिक कमजोर हो गया था 

“मैं थोड़ी डर गई थी  जब मेरे बच्चे को हर रोज़ बुखार होने लगा । हमने सोचा कि हमें  उसके खून की जाँच करवानी चाहिए। लेकिन जो रिपोर्ट्स में आया उसकी हमने सपने में भी कल्पना नहीं की थी । विराट को कंजेनिटल मेटाक्रोमैटिक ल्यूकोडायस्ट्रॉफी है, एक ऐसी स्थिति जिसे हम आज तक ठीक से समझ नहीं पाएँ हैं । मैं बस इतना जानता हूँ कि मेरा बच्चा समय के साथ मानसिक रूप से कमजोर होता जा रहा है और एक दिन मर भी सकता है।”


विराट के दिमाग की काम करने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो रही है  

विराट को सबसे दुर्लभ किस्म के मेटाबोलिक  डिसऑर्डर्स में से एक है जो उसकी मानसिक वृद्धि को रोक देगा और बाद में उसकी याददाशत चली जाएगी। उसकी लगातार खराब हो रही हालत के कारण  उसे तुरंत बोन मैरो-ट्रांसप्लांट की ज़रूरत है, बिना इसके वह लंबे समय तक जी नहीं पाएगा।

"विराट एक बहुत ही जिंदादिल बच्चा था। धीरे धीरे उसने बोलना कम कर दिया है / वह निर्देशों को नहीं समझ पाता है। वह सुनता है लेकिन समझ नहीं पाता है। उसकी  हालात ऐसी हो चुके हैं कि वह यह भी नहीं समझ पाता कि मल करते समय उसे बैठना होता है ।अगर उसे भूख भी लगती है तो भी वह नहीं समझ पाता है कि  उसे भूख लगी है। उसे चीजें समझा पाना बहुत मुश्किल है। कभी-कभी तो वह बिना किसी कारण के रोने लगता है। यह देखकर बहुत ही दुःख होता है कि मेरा मासूम सा बच्चा जो कुछ महीने पहले  तक बिलकुल ठीक था, अब उसे दिमागी बीमारी से जूझना पड़ रहा है। "

माता-पिता हर दर्द सहने के लिए तैयार हैं लकिन वो  एक और बच्चा नहीं खो सकते है 

अपने 12 वर्षीय बेटे को सीज़र अटैक से खोने के  बाद, हिरकोर के लिए ये स्वीकार करना और भी मुश्किल है कि वह विराट को भी खो सकती है । अपने बच्चे को मरता हुआ देखना उसके बस से बाहर है।

"हमें अपने बच्चे को अस्पताल ले जाने के लिए हर बार 500 किमी दूर जाना पड़ता है। यह ना केवल शरीर तोड़ने जैसा है बल्कि इसके लिए मुझे अपना  काम भी छोड़ना पड़ता है। एक दिन का भी पगार ना मिलना अब बहुत दर्दनाक है। मैंने पहले से ही अपने ऑफिस से उधार लिया हुआ है। मेरे पगार की एक बड़ी रकम कर्ज़ा वापस चुकाने में ही खत्म हो जाती है। चीजें दिन-प्रतिदिन मुश्किल होती जा रही हैं।” माणिक, विराट के पिता।  
 

एक अच्छी आय होने के बावजूद, मणिक के पास अपना घर बेचने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है  

माणिक हर महीने 30,000 रुपये कमाता है। उस पगार में से ही उसके लोन की रकम कटती है। अपने वेतन से उसे अपने परिवार का गुज़ारा करना होता है और विराट के इलाज का भी खर्चा उठाना पड़ता है जो कि एक बहुत बड़ा खर्चा है।

"मैं पहले ही उसके इलाज पर 3.5 लाख रुपये खर्च कर चुका हूँ। विराट को बचाने के लिए, हमारे पास एकमात्र विकल्प  बोन मैरो ट्रांसप्लांट है। रिटायरमेंट के बाद भी, मेरे पास इतनी बड़ी  रकम नहीं होगी। मैं पहले से ही कर्ज में हूँ और 36 लाख रुपये की व्यवस्था करना मेरे लिए लगभग असंभव  है। अब  घर को बेचना ही हमारे पास आखिरी विकल्प बचा  है , लेकिन इसे बेचकर भी हम इतनी बड़ी रकम नहीं जुटा पाएंगे । मुझे नहीं पता कि  मैं  उसके इलाज़ के लिए  पैसे कहाँ से लाऊँगा लेकिन मैं  विराट को और अधिक बीमार और मरता हुआ नहीं देख सकता हूँ /”
 

आप कैसे मदद कर सकते हैं 


विराट एक दुर्लभ किस्म की बीमारी से पीड़ित है जो उसे मानसिक रूप से अपाहिज बना सकती है और उसकी जीवन भी ले सकती है अगर जल्द ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट ना कराया गया तो । अब उसे बचाने के लिए 36 लाख रुपये की ज़रूरत है। उसके माता-पिता इलाज के लिए इतनी बड़ी रकम की व्यवस्था नहीं कर सकते। और थोड़ी सी भी देरी उसके लिए जानलेवा हो सकती है।

आपका समर्थन विराट को सामान्य जीवन जीने में मदद कर सकता है

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The specifics of this case have been verified by the medical team at the concerned hospital. For any clarification on the treatment or associated costs, contact the campaign organizer or the medical team.

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