Help Children in Difficult Areas in Getting Quality Education | Milaap
This is a supporting campaign. Contributions made to this campaign will go towards the main campaign.
Milaap will not charge any fee on your donation to this campaign.

Help Children in Difficult Areas in Getting Quality Education

Tax benefits
What is i-Saksham?

i-Saksham is working in remote and conflict-ridden areas of the country (Bihar as of now), where local youths are selected and trained in use of digital technology, text books, pedagogy and other relevant tools and techniques to deliver quality education, using low-cost android tablets. These trained youths, significant of whom are girls, in turn run tuition centers where they teach community children at a nominal fee, under the mentoring of i-Saksham team, thus providing them with in-village earning opportunity.

What is the current scale of i-Saksham and future plans?

As of today we i-Saksham has trained more than 1,000 youth.  i-Saksham has started an i-Saksham Fellowship wherein we are working with high potential trained youth for a longer term period. Some of them are running their own learning centres while some of them are teaching in Government schools.i-Saksham aspires to build community of 10,000 community educators and cover 1 Million children  by 2025 along with building a sustainable and an expandable model.

How can you help?

We plan to raise INR 3.5 Million to be arranged through family, friends and their network. This money will be used towards establishing learning centres, buying android tablets  (INR 10,000 for tablets and accessories) and towards logistics costs for training and mentoring the learning centre.

We seek your financial assistance (through you and your friends). Whatever you contribute will go on to make a big difference along it being available for 80G tax benefit under the Income Tax Act.

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6th November 2020
जज्बा जो छिपाए न छुपे!

Dear friends, here is an experience from Ekta, our team members, while interviewing potential edu-leaders for coming batch. It moved us. We know it will move you as well.


हमारे कार्यों के दौरान कई बार ऐसे पल आते हैं जो हमे हमारी ज़िम्मेदारी का अहसास कराने के साथ साथ हमारे दिल के हमेशा करीब रहे जाते हैं| कई बार दूसरों के जीवन की कहानी से हम इतना प्रभावित हो उठते हैं कि हम अपने कर्तव्यों के और नज़दीक हो जाते हैं| कुछ ऐसा ही हुआ इस बार आई-सक्षम फ़ेलोशिप के लिए हो रहे महिलाओं के साक्षात्कार में| आई-सक्षम परिवार से एकता अपने अनुभव को साझा करते हुए कहती हैं:

मैं बहुत संक्षिप्त में उन बातों को साझा करना चाहूंगी जिसने मुझे प्रभावित किया है और इंटरव्यू के लिए आई महिलाओं ने मुझे सीखने का मौका दिया है | आज हमलोगों ने जमुई में 24-25 महिलाओं का इंटरव्यू लिया | जिसमें से मेरे समूह व् मुझे 13 महिलाओं से बात करने का मौका मिला | इनमें से ज्यादातर महिलाएं शादीशुदा हैं | इंटरव्यू से पहले हमलोग आपस में यही बात कर रहे थे कि "अधिकांश महिलाएं शादीशुदा है | पता नहीं वो परिवार की जिम्मेदारियों के साथ किस तरह हमारे फ़ेलोशिप से सक्रिय रूप से जुड़ी रह पाएंगी ?" अगर मैं अपनी बात कहूँ तो मेरे मन में एक ही सवाल आ रहा था कि "क्या इनमें उतनी उर्जा होगी?"

 

पर जब मैंने इन महिलाओं से बात की तो मैं दंग रह गयी | इनमें से अधिकांशतः महिलाओं की शादी को 8 से 10 साल हो गए थे पर आज भी उनके अन्दर उनके सपनो को लेकर वही जज्बा है जो उनमे शादी से पहले रहा होगा| आज भी उनके मन में खुद के लिए कुछ करने का उतना ही जूनून है जितना शायद उन सपनो को देखने की शुरुआत में रहा होगा|

एक बात जो 5 महिलाओं ने कही वह यह है कि "हमें यहाँ आ कर बहुत अच्छा लग रहा है | हमसे लोग अक्सर हमारे परिवार के बारे में पूछते हैं | बहुत कम ऐसा होता है कि हमें खुद के बारे में बात करने का मौका मिलता है | आपलोग आज इतना धैर्य से मेरे बारे में सुन रहे हैं; हमको बताकर अच्छा लग रहा है | हम तो अपने जीवन में कुछ करना चाहते थे पर कभी इस तरह का मौका नहीं मिला |" जब उनसे यह पूछा गया कि "क्या आप सप्ताह में एक दिन अपने गाँव से ट्रेनिंग के लिए यहाँ जमुई ऑफिस आ पाएंगी? एक महिला ने बहुत प्यार से जवाब दिया, "क्यों नहीं! कम से कम एक दिन तो अपने मन से आने जाने का मौका मिलेगा | फिर यहाँ नए दोस्त भी तो बनेंगे ”| 

इंटरव्यू के दौरान महिलाओं के द्वारा समाज के अनेकों परिवेश को जान्ने का मौका मिला| जहाँ कुछ महिलाओं ने अपने घर से बाहर काम न कर पाने का कारण अपने ससुराल की जिम्मेदारियां बताई तो वहीँ एक महिला ने बताया कि उनकी सास उनके साथ यहाँ इंटरव्यू दिलवाने के लिए आई हैं | वे चाहती हैं कि उनकी बहु आगे बढ़े | 


एक महिला से जब यह पूछा कि “आपके अनुसार आपके गाँव में शिक्षा की स्थिति कैसी है” तो इसका जवाब देते-देते वे भावुक हो गई | उन्होंने बताया कि उनके गाँव में स्कूल नहीं था | किसी तरह से गाँव वालों ने छोटे से जगह में सरकार को अर्जी देकर स्कूल बनवाया था पर फिर भी शिक्षा की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है | उनको इस बात की चिंता है कि अगर उनके बच्चे नहीं पढेंगे तो क्या होगा | पूरा गाँव पिछड़ा ही रह जायेगा साथ-साथ उनका बेटा भी | 


इन से बात करने के बाद मेरा सवाल, सवाल नहीं रहा | मुझे लगता है सपना देखने और उसके पीछे भागने की कोई उम्र नहीं होती| फर्क बस इतना है किसी को सहयोग मिलता है और कोई इसके आभाव में पीछे रह जाता है| परंतु इन महिलाओं में अपने सपनो को जीने का जज्बा आज भी है और उनकी निरंतर कोशिश आज भी ज़ारी है| 


आई-सक्षम टीम के सदस्यों का ऐसा अनुभव हमे समक्ष इस बात को उजागर करता है की हमारे समाज में महिलाओं में अनेकों हुनर छिपे हुए हैं| वे परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ अपने देश व् समाज की बेहतरी की ज़िम्मेदारी भी बखूबी निभा सकती हैं| पिछले 5 साल के सफ़र में लगभग 150 ऐसी ही महिलाओं ने आई-सक्षम फ़ेलोशिप से जुड़ कर अपने समाज की शिक्षा की बेहतरी के लिए कार्य किया है और आज भी शिक्षा से जुडी हुई हैं| यह महिलाएं हमारे लिए एक प्रेरणा हैं और इनका जज़्बा हमारी ताकत| 


जज्बा जो छिपाए न छुपे!

Dear friends, here is an experience from Ekta, our team members, while interviewing potential edu-leaders for coming batch. It moved us. We know it will move you as well.


हमारे कार्यों के दौरान कई बार ऐसे पल आते हैं जो हमे हमारी ज़िम्मेदारी का अहसास कराने के साथ साथ हमारे दिल के हमेशा करीब रहे जाते हैं| कई बार दूसरों के जीवन की कहानी से हम इतना प्रभावित हो उठते हैं कि हम अपने कर्तव्यों के और नज़दीक हो जाते हैं| कुछ ऐसा ही हुआ इस बार आई-सक्षम फ़ेलोशिप के लिए हो रहे महिलाओं के साक्षात्कार में| आई-सक्षम परिवार से एकता अपने अनुभव को साझा करते हुए कहती हैं:

मैं बहुत संक्षिप्त में उन बातों को साझा करना चाहूंगी जिसने मुझे प्रभावित किया है और इंटरव्यू के लिए आई महिलाओं ने मुझे सीखने का मौका दिया है | आज हमलोगों ने जमुई में 24-25 महिलाओं का इंटरव्यू लिया | जिसमें से मेरे समूह व् मुझे 13 महिलाओं से बात करने का मौका मिला | इनमें से ज्यादातर महिलाएं शादीशुदा हैं | इंटरव्यू से पहले हमलोग आपस में यही बात कर रहे थे कि "अधिकांश महिलाएं शादीशुदा है | पता नहीं वो परिवार की जिम्मेदारियों के साथ किस तरह हमारे फ़ेलोशिप से सक्रिय रूप से जुड़ी रह पाएंगी ?" अगर मैं अपनी बात कहूँ तो मेरे मन में एक ही सवाल आ रहा था कि "क्या इनमें उतनी उर्जा होगी?"

 

पर जब मैंने इन महिलाओं से बात की तो मैं दंग रह गयी | इनमें से अधिकांशतः महिलाओं की शादी को 8 से 10 साल हो गए थे पर आज भी उनके अन्दर उनके सपनो को लेकर वही जज्बा है जो उनमे शादी से पहले रहा होगा| आज भी उनके मन में खुद के लिए कुछ करने का उतना ही जूनून है जितना शायद उन सपनो को देखने की शुरुआत में रहा होगा|

एक बात जो 5 महिलाओं ने कही वह यह है कि "हमें यहाँ आ कर बहुत अच्छा लग रहा है | हमसे लोग अक्सर हमारे परिवार के बारे में पूछते हैं | बहुत कम ऐसा होता है कि हमें खुद के बारे में बात करने का मौका मिलता है | आपलोग आज इतना धैर्य से मेरे बारे में सुन रहे हैं; हमको बताकर अच्छा लग रहा है | हम तो अपने जीवन में कुछ करना चाहते थे पर कभी इस तरह का मौका नहीं मिला |" जब उनसे यह पूछा गया कि "क्या आप सप्ताह में एक दिन अपने गाँव से ट्रेनिंग के लिए यहाँ जमुई ऑफिस आ पाएंगी? एक महिला ने बहुत प्यार से जवाब दिया, "क्यों नहीं! कम से कम एक दिन तो अपने मन से आने जाने का मौका मिलेगा | फिर यहाँ नए दोस्त भी तो बनेंगे ”| 

इंटरव्यू के दौरान महिलाओं के द्वारा समाज के अनेकों परिवेश को जान्ने का मौका मिला| जहाँ कुछ महिलाओं ने अपने घर से बाहर काम न कर पाने का कारण अपने ससुराल की जिम्मेदारियां बताई तो वहीँ एक महिला ने बताया कि उनकी सास उनके साथ यहाँ इंटरव्यू दिलवाने के लिए आई हैं | वे चाहती हैं कि उनकी बहु आगे बढ़े | 


एक महिला से जब यह पूछा कि “आपके अनुसार आपके गाँव में शिक्षा की स्थिति कैसी है” तो इसका जवाब देते-देते वे भावुक हो गई | उन्होंने बताया कि उनके गाँव में स्कूल नहीं था | किसी तरह से गाँव वालों ने छोटे से जगह में सरकार को अर्जी देकर स्कूल बनवाया था पर फिर भी शिक्षा की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है | उनको इस बात की चिंता है कि अगर उनके बच्चे नहीं पढेंगे तो क्या होगा | पूरा गाँव पिछड़ा ही रह जायेगा साथ-साथ उनका बेटा भी | 


इन से बात करने के बाद मेरा सवाल, सवाल नहीं रहा | मुझे लगता है सपना देखने और उसके पीछे भागने की कोई उम्र नहीं होती| फर्क बस इतना है किसी को सहयोग मिलता है और कोई इसके आभाव में पीछे रह जाता है| परंतु इन महिलाओं में अपने सपनो को जीने का जज्बा आज भी है और उनकी निरंतर कोशिश आज भी ज़ारी है| 


आई-सक्षम टीम के सदस्यों का ऐसा अनुभव हमे समक्ष इस बात को उजागर करता है की हमारे समाज में महिलाओं में अनेकों हुनर छिपे हुए हैं| वे परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ अपने देश व् समाज की बेहतरी की ज़िम्मेदारी भी बखूबी निभा सकती हैं| पिछले 5 साल के सफ़र में लगभग 150 ऐसी ही महिलाओं ने आई-सक्षम फ़ेलोशिप से जुड़ कर अपने समाज की शिक्षा की बेहतरी के लिए कार्य किया है और आज भी शिक्षा से जुडी हुई हैं| यह महिलाएं हमारे लिए एक प्रेरणा हैं और इनका जज़्बा हमारी ताकत| 


25th October 2020
We are excited to bring this extremely interesting opportunity by TFIx.
(TFIx is a year long incubation program for education entrepreneurs who want to adopt Teach For India’s Fellowship Model into their own context.)

Ravi, the CEO and co-founder of i-Saksham would be sharing the experience of work during the covid crisis in a webinar on 26th Oct evening.

Engage with our speakers Shaheen Mistri (CEO & Founder of Teach For India) and Ravi Dhanuka (Co-Founder, iSaksham Education Foundation) who will share how they made meaning of an ambiguous and changing landscape, to make strategic decisions, and igniting commitment from those they lead.

Date & Time: 26th October 2020; 5:30pm - 6:30pm

If you are interested please do REGISTER HERE:
https://forms.gle/xaoSMNXhzqcf1miZ8
We are excited to bring this extremely interesting opportunity by TFIx.
(TFIx is a year long incubation program for education entrepreneurs who want to adopt Teach For India’s Fellowship Model into their own context.)

Ravi, the CEO and co-founder of i-Saksham would be sharing the experience of work during the covid crisis in a webinar on 26th Oct evening.

Engage with our speakers Shaheen Mistri (CEO & Founder of Teach For India) and Ravi Dhanuka (Co-Founder, iSaksham Education Foundation) who will share how they made meaning of an ambiguous and changing landscape, to make strategic decisions, and igniting commitment from those they lead.

Date & Time: 26th October 2020; 5:30pm - 6:30pm

If you are interested please do REGISTER HERE:
https://forms.gle/xaoSMNXhzqcf1miZ8
30th April 2020

i-Saksham: Experiencing the power of community!
Dear All,

We hope that you and your near-dear ones are safe and healthy. This update is to share with you how our edu-leaders* and community have inspired us in this time of crisis and transformed the ways education is reaching children at home in deep interior pockets of Munger (most affected in Bihar State), and Jamui Districts of Bihar. We seek your support to circulate this update among relevant networks for exploring collaboration opportunities and ideas for further innovative ways.
Step 1: Assessing the ground situation
Our team did a telephonic survey of about 500 parents to check how the community is faring and the status of learning among children. We learned that:


Step 2: Designing delivery for maximum impact: i-Saksham took the following approach:



Edu-leaders teaching over the
 phone for 2 hours every day.
                     
                      Children being assisted by parents.
                                                         
                                                                       
                                              Encouraging self-learning
Step 3: Creative initiatives by edu-leaders

a. Storytelling through phone

Sonam, a fellowship alumna took the initiative to narrate stories to her students through the phone.
After narrating stories to them, she gives writing and drawing based homework to children to express their learning.

b. Teaching mathematics online

Praveen, an edu-leader from the second batch of fellowship convinced parents to share smartphones with children for at least 2 hours/day.
He is now making them solve mathematics exercises through phone/video calls.

c. Distributing worksheets through Kirana store

Anshu, an edu-leader came up with an amazingly innovative idea of distributing worksheets to the parents of her students through her father's Kirana store.

Learning and way forward

Such times push us to the wider limits of our imagination. The challenge is immense, and there can be no substitute for the in-person classroom learning. Our community is taking all the possible efforts in the event of school close-downs and limited internet availability.

We took an integrated approach to train our edu-leaders, give them access to digital content, prepare structured lesson plans, and involve caregivers.

We look forward to your suggestions on strengthening the approach further.




_________________________________
* Edu-leader is a youth from the local community who undergo a two-year i-Saksham fellowship program. They teach in nearby govt schools as a fellow volunteer daily for 2-3 hours, and work with the community to enhance their participation and ownership in the educational outcomes of children.

i-Saksham: Experiencing the power of community!
Dear All,

We hope that you and your near-dear ones are safe and healthy. This update is to share with you how our edu-leaders* and community have inspired us in this time of crisis and transformed the ways education is reaching children at home in deep interior pockets of Munger (most affected in Bihar State), and Jamui Districts of Bihar. We seek your support to circulate this update among relevant networks for exploring collaboration opportunities and ideas for further innovative ways.
Step 1: Assessing the ground situation
Our team did a telephonic survey of about 500 parents to check how the community is faring and the status of learning among children. We learned that:


Step 2: Designing delivery for maximum impact: i-Saksham took the following approach:



Edu-leaders teaching over the
 phone for 2 hours every day.
                     
                      Children being assisted by parents.
                                                         
                                                                       
                                              Encouraging self-learning
Step 3: Creative initiatives by edu-leaders

a. Storytelling through phone

Sonam, a fellowship alumna took the initiative to narrate stories to her students through the phone.
After narrating stories to them, she gives writing and drawing based homework to children to express their learning.

b. Teaching mathematics online

Praveen, an edu-leader from the second batch of fellowship convinced parents to share smartphones with children for at least 2 hours/day.
He is now making them solve mathematics exercises through phone/video calls.

c. Distributing worksheets through Kirana store

Anshu, an edu-leader came up with an amazingly innovative idea of distributing worksheets to the parents of her students through her father's Kirana store.

Learning and way forward

Such times push us to the wider limits of our imagination. The challenge is immense, and there can be no substitute for the in-person classroom learning. Our community is taking all the possible efforts in the event of school close-downs and limited internet availability.

We took an integrated approach to train our edu-leaders, give them access to digital content, prepare structured lesson plans, and involve caregivers.

We look forward to your suggestions on strengthening the approach further.




_________________________________
* Edu-leader is a youth from the local community who undergo a two-year i-Saksham fellowship program. They teach in nearby govt schools as a fellow volunteer daily for 2-3 hours, and work with the community to enhance their participation and ownership in the educational outcomes of children.
Rs.5,500 raised

Goal: Rs.10,000

Beneficiary: i-Saksham Educa... info_outline
80G tax benefits for INR donations

Supporters (2)

AB
AB donated Rs.3,500

स्वेता दी, आपके आई सक्षम के प्रति मेंहनत और योगदान के लिए बधाई। आने वाले जीवन के लिए शुभकामनाएं ।

Lk
Lalit donated Rs.2,000

Desh padega,desh badhega