गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु for the protection and promotion of | Milaap
गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु for the protection and promotion of
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    Shri ram sunam gauvansh seva dham

    from Satna, Madhya Pradesh

Story

सादर जनों को सादर नमन,
परम पूज्यनीय श्री हनुमान दास जी महाराज ने  4 वर्ष पूर्व श्री राम सुनाम गौवंश सेवा धाम, सतना (म.प्र.) मे ऐरा गायों (जिन गायों की कोई सेवा नहि करता) के रहने खाने की व्यवस्था की, शुरुआत मे 9 हजार गाय थीं।
हर जगह से जीवों के प्रति संवेदना, दया एवं प्रेम का बोध रखते हुये निस्वार्थ भाव से सेवा में लगे। सहयोग की भावना से कार्य में संलग्न हुये, शुरुआत में गुरु जी ने राम नाम के बल से विपत्तियों का सामना किया परंतु कुछ समय पश्चात बहुत दिक्कतें आईं तब भी महाराज जी ने 9 हजार गायों की 1 वर्ष तक दिन रात सेवा की।
परंतु आर्थिक स्थिति इतनी बिगड़ गई की कर्जा बहुत हो गया और system के साथ तालमेल ना होने से व्यवस्था चरमरा गई।
तो कुछ दिन गायों की सेवा नहि होने से उन्हे फिर से जंगल मे जहाँ से लाई गई थीं, वहाँ भेजा गया। गोशाला में आसपास के गाँव के लोगों को रोजगार भी दिया गया।
आज गौशाला में 400 गाय और उनकी सेवा में 5 से 7 लोगों को रखा गया है लेकिन अर्थ की व्यवस्था ना होने से निरंतर परेशानी बनी हुई है,

क. आवागमन में बाधक एवं जनधन की हानि-

आये दिन एक्सीडेंट हो रहे है जिससे लोगों की मौत होती है , सड़कों में घूमने एवं बैठने वाले गोवंश के कारण आए दिन एक्सीडेंट होते हैं जिससे धन जन की हानि होती है समय का प्रचुर मात्रा में नुकसान होता है रास्तों में गोवंश बैठे रहते हैं या खड़े रहते हैं  जिससे जिस रास्ते को तय करने में हमें 10 मिनट लगना चाहिए तो कभी-कभी उस रास्ते को तय करने में 30 मिनट लग जाता है तो एक व्यक्ति का 10 मिनट 20 मिनट या 1 घंटे का नुकसान हो रहा है तो कितने लोग यात्रा करते होंगे और उनका अगर आप औसत निकाले तो आपका कई दिनों का नुकसान हो जाता है और उसमें हम कितने बड़े सकारात्मक कार्य कर सकते हैं तो समय का भी बहुत बड़ा नुकसान होता है। अगर इनको व्यवस्थित नहीं किया गया तो किसान आप देख रहे हैं कि किसानों को रात रात भर आवारा गोवंश से अपने फसल को बचाने के लिए जागरण करना पड़ता है और जब लगातार कई कई रातों तक कोई व्यक्ति जागेगा सोएगा ही नहीं तो निश्चित रूप से उसका प्रभाव उसके मन पर पड़ेगा बुद्धि पर पड़ेगा शरीर पर पड़ेगा और मानसिक रूप से धीरे-धीरे विक्षिप्त होते जाएंगेजिससे किसान क्रोध में रहते हैं अशांत रहते हैं अस्थिर रहते हैं इससे उनका व्यवहार भी अपने परिवार के साथ ठीक नहीं रहता ,भोजन करने उन्हें 10:00 बजे आना था लेकिन वहां मवेशियों की वजह से वह 1:00 बजे आ रहे हैं और पूरा परिवार जग जाता है

ख. गावँ के लोगों में आपस मे बढ़ रहा बैर व वैमनस्यता-

गाँवों मे गलती से किसी के खेत में किसी का गोवंश चला गया तो उसका नुकसान सुनिश्चित होता है फिर आपस में गाली गलौज करते है जिससे आपसी मतभेद बढ़ रहा है इतना ही नहीं गांव के गांव एक दूसरे के विरोधी बन जाते हैं क्योंकि इस गांव वाले उस गांव में गौवंश को आगे बढ़ा देते हैं और वह गांव वाले फिर कहीं आगे बढ़ाएंगे वापस करेंगे तो गांव के गांव एक दूसरे के द्रोही बने हुए हैं ,बड़े बड़े झगड़े हो जाते हैं और मर्डर तक हो जाते हैं ।
इसके बाद जब किसी किसान का खेत चर जाता है तो वह क्रोध के मारे क्या करता है कभी करंट लगाएगा कभी आटा में मिलाकर के रोटी में जहर रखेगा जिसको कोई भी मवेशी खा लेता है और वह मरते हैं तो कुल मिलाकर के विरोध में धीरे-धीरे जीवो के प्रति किसानों के मन में जो प्रेम का भाव रहता था वह प्रेम का भावना ना रहकर के बैर का भाव और हिंसा का भाव बढ़ता जा रहा है यह भी समाज के लिए ठीक नहीं है

ग. जीवों के प्रति तेजी से बढ़ रही संवेदनहीनता एवं हिंसात्मक प्रकृति-

इसी के साथ-साथ अगर आप इन सड़कों में कुछ किलोमीटर की यात्रा करें तो कोई ना कोई आपको मृतक गोवंश जरूर मिल जाएगा और जब बार-बार आप किसी न किसी को मरते, तड़पते या किसी प्रकार से हिंसात्मक कुछ भी होते हुए देखते हैं तो धीरे-धीरे ही आपकी प्रवृत्ति में बदलाव आ ही जाता है इससे आपकी संवेदना नष्ट होती है और जब आप संवेदनहीन होते जाएंगे तो संवेदनहीन समाज में एक दूसरे का काम कोई भी नहीं आएगा, इसलिए अगर कभी कोई कष्ट में भी है, तो कोई असहाय की मदद करने के लिए आगे नहीं आएगा ।
तो संवेदनहीनता ना बने संवेदनशील समाज बने इसके लिए भी गोवंश संरक्षण बहुत आवश्यक है।

इतना सब कुछ होने के बाद भी जब किसान खेती करते हैं और जब खलिहान चर जाते हैं तो जिनके पास पैसा है वह लोग तो तार-बाड़ कर लेते हैं या कुछ ना कुछ उपाय करते हैं जब कोई गोवंश बहुत भूखा होता है तो शरीर को कंटीली तारों से कट जाने से भी नहीं डरता।
और गरीब व्यक्ति तो तार-बाड़ लगाने का विचार भी नहीं कर सकता है इसलिए वह कृषि कार्य को ही छोड़ रहा है 
छोटे किसानों के खेत पड़े हुए हैं जिससे जमीन बंजर होती जाएंगी बेरोजगारी बढ़ती जाएगी मजबूर होकर के उनको बाहर जाना पड़ेगा और जब खेती छोड़ेंगे तो उत्पादन में कमी आएगी यह भी एक प्रकार का संकट ही है 
कृषि कार्य छोड़कर पलायन करने वाला व्यक्ति जब कृषि कर रहा था तो उसने भी एक दो या तीन मवेशी रखे हुए थे गोवंश रखा हुआ था लेकिन जब वह स्वयं पलायन कर रहा है तो वह गोवंश को छोड़ कर जाता है जिससे समाज की समस्याओं को और बढ़ा देते हैं

घ. भूमि संरक्षण, कृषि संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण- 
भूमि बंजर होने से हरियाली नष्ट हो जाती है जो कि आंखों के लिए और मन की प्रसन्नता के लिए बहुत आवश्यक है पौधों की कमी होने से ऑक्सीजन के उत्पादन में कमी होगी जिससे कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ेगी इसी वजह से हिमालय का तेजी से क्षरण होगा, हिमालय भी तेजी से खत्म होंगे। हमने सुना है कि ओजोन परत में पहले ही छिद्र हो चुका है  और उस से आने वाली किरणें मनुष्य के लिए एवं अन्य प्राणियों के लिए भी बहुत नुकसानदायक है  और हम लोगों के लिए वह और भी घातक होती जाएंगी।
फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए जमीन में जितनी ज्यादा उर्वरक एवं कीटनाशक इत्यादि का प्रयोग होता जा रहा है , जमीन उतनी ही ज्यादा जहरीली होती जा रही हैं एवं प्राणदायक अन्न ही विषैला होते जा रहा है जिससे अनेकों प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होती जा रही हैं उसे पुनः शुद्ध एवं स्वास्थ्य वर्धक एवं विष रहित बनाने के लिए देशी गाय के खुर ,गोबर-मूत्र व स्पर्श की आवश्यकता होती है अतः इन देशी गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन अनिवार्य है जिससे आगे आने वाली पीढ़ियों को हम खाने के लिए जहर नहीं बल्कि शोध एवं स्वास्थ्य वर्धक अन्न दे सके ।
मनुष्य को अनेक बीमारियों से बचाने में यहां तक कैंसर जैसी अन्य बड़ी बीमारियों से छुटकारा पाने में एवं बचाव करने में केवल इसी देसी गो का मूत्र एवं दूध ही उपयोग में आता है अतः मानवता की और मानव की रक्षा के लिए इनका संरक्षण एवं संवर्धन अनिवार्य है 
इन सब में भी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो लोग समाज की सार्वजनिक एवं व्यक्तिगत समस्याओं में आगे आकर लोगों को एकजुट करके समस्याओं से लड़ने के लिए प्रेरित करते हैं और उनके साथ खड़े होते हैं उनको दिशा निर्देश करते हैं जब इस प्रकार के लोग ही हमें संकट में छोड़ देंगे,  हमारे लिए ही वह लोग आगे आए और हमने उन्हें संकट की घड़ी में ही बाद में पीछे हो गए और हमने उनका सहयोग नहीं किया। धीरे-धीरे ऐसे लोग अपने आप को सीमित करते जाएंगे 
और इस स्वार्थ पूर्ण जीवन जीने वाले लोगों की भीड़ में निस्वार्थ, समाधान- युक्त, सुलझी ,सब के कल्याण एवं हित की भावना से युक्त बुद्धि रखने वाले व्यक्ति अगर आगे आने से बचने लगेंगे तो यह समाज जिसकी हम कल्पना करते हैं कि आपस में प्रेम हो आपसी सौहार्द हो आपसी एक दूसरे के प्रति कल्याण की भावना हो ।
जो लोग समाज में सुख शांति आनंद व कल्याण की भावना से कार्य कर रहे हैं हमें उनके साथ खड़े होकर हर तरह से योगदान देना चाहिए जिससे ऐसे लोग समाज में बने रहें एवं समय-समय पर समाज को मार्गदर्शन एवं दिशा-निर्देश एवं जरूरत पड़े तो साथ में लगकर लोगों को एकजुट करके शांतिमय, सुखमय समाज को स्थापित करने में आगे आते रहे , मदद करते रहें इसलिए आर्थिक , शारीरिक व मानसिक सहयोग करके ऐसे लोगों को , उनके मनोबल को बढ़ाएं और प्रोत्साहित करें जिससे ऐसे लोग आगे आकर ,हमेशा जब भी कोई समाज में समस्या आए तो उनको समाधान दें जिससे सुखमय शांतिमय एवं प्रेममय समाधि में स्थापित हो सके


सनातन धर्म की अमूल्य धरोहर की सुरक्षा के इस कार्य में आप लोगों की मदद चाहिये।
Regards to all the people, Param Pujya Shri Hanuman Das Ji Maharaj made arrangements for the stay of Aira cows (cows which no one serves) 4 years ago in Shri Ram Sunam Gauvansh Sewa Dham, Satna (MP), Initially there were 9 thousand cows. Keeping a sense of kindness and love from everywhere, engaged in service. Engaged in the work with the spirit of cooperation, in the beginning Guru ji faced the calamities with the power of the name of Ram, but after some time there were many problems, even then Maharaj ji served 9 thousand cows day and night for 1 year. But the economic situation deteriorated so much that the debt became too much and the system collapsed due to lack of coordination with the system. So due to lack of service of cows for some days, they were again sent to the forest from where they were brought. The people of the surrounding villages were also given employment in the Gaushala. Today 400 cows have been kept in Gaushala and 5 to 7 people have been kept in their service, but due to lack of financial system, there is a constant problem, you need your help in this task of protecting the invaluable heritage.


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