Help Laborers, Strengthen their Media: मैं मजदूर बोल रहा हूँ 🎤📽🗞️⚖ | Milaap
Help Laborers, Strengthen their Media: मैं मजदूर बोल रहा हूँ 🎤📽🗞️⚖
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    Bolta Hindustan
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    This fundraiser will benefit

    Daily wagers and families

    from India

Story

Reporting with charity : Reporters will help the laborers .

(Reporting with Philanthropy:   Philanthreporting )

Read to know how-
Millions of labourers have  gone back to their homes after losing all the opportunities of employment. They are not left with capital or any other means to survive and sustain. Infact, it has become difficult for them to arrange basic amenities including food and water.

◆How will the labourers survive?
◆Will they migrate back to towns and cities or look for employment in their own villages?

◆How are their families making their ends meet during these pressing times?

◆ Will they ever again believe in the idea of development and the model of 'Vikas'?

Answers to these questions will be now searched through ground reports.
And after this, concerned authorities and government will be informed and every possible help will be provided to the laborers.

Alongwith this, few more questions will be addressed. For example:-

◆ How to provide help to those who urgently need help?
◆ How to provide sanitizers, mask and sanitary pads to women?
◆How will the school kids and other necessary requirements of children be taken care of?

Such questions will be addressed and taken care by our own team. All the necessary things will be provided to the needy.
NGO's will be contacted to ensure the distribution taking place properly at the community level.

The expenditure of reporting and charity will be funded by common people.
Crowdfunding will be used to raise the issues of labourers as well as to provide the marginalized with important requirements.

5 teams with 3 journalists in each team will be formed.
Out of five teams, four will be sent across the country while one central team will work from Delhi.

Every team will consist of a cameraman,  a reporter and a video editor. This would mean that 15 renowned journalists trained from prestigious institutions like IIMC will be given the responsibility.

For these 15 journalists, basic requirements will cost minimum Rs 4 lakhs per month.

Hence, it will amount to 12 lakhs for 3 months.


Labourers and their families who come in contact amidst reporting will be made aware through awareness campaigns and will be provided some necessary things.

Like- Women will be provided sanitary napkins, Everyone will be provided sanitisers and masks. School children will be given essentials for education.

With approximate expense of 65,000 - 70,000 per month, every team shall provide relief material of around ₹2 lakh within three months.

This equates to ₹10 lakhs worth relief material being provided by the five teams.

Total crowdfunding worth 22

Crowdfunding worth ₹22 lakh will be received in bank account of our foundation namely 'VidMo Media Foundation'.

With this crowdfunding, we will not only help raise the concerns of labourers but will also help in providing them immediate relief.


रिपोर्टिंग विद चैरिटी: रिपोर्टर बनेंगे मजदूर मित्र
समझें कैसे-
कई मिलियन मजदूर लगभग बेरोजगार होकर वापस अपने घरों की ओर लौट गए हैं। सरवाइव करने के लिए उनके पास पूंजी नहीं है खाने-पीने तक का भारी संकट आने वाला है।

ये मजदूर अब कैसे सरवाइव करेंगे?
दुबारा शहरों की ओर लौटेंगे या फिर ग्रामीण क्षेत्रों में ही कमाई के जरिया तलाश लेंगे?

अभाव के इस वक्त में इनके बच्चे और इनके परिवार कैसे रह रहे हैं?

विकास की इस व्यवस्था में अब वह दुबारा यकीन करेंगे कि नहीं?

इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। जिम्मेदार सरकार और अथॉरिटी को को सूचित करते हुए हर संभव मदद करवाई जाएगी।

इसके साथ ही कुछ और सवालों को जोड़े जाएंगे।
जिन्हें अर्जेंट में एसेंशियल जरूरत है, उनको मदद कैसे पहुंचेगी?
सैनिटाइजर  मास्क  और महिलाओं के सैनिटरी पैड की व्यवस्था कैसे हो पाएगी ?
स्कूल किट और बच्चों के अन्य जरूरी चीजें कैसे आ पाएंगी?
इनके जवाब खुद हमारी टीम करेगी।
इन सभी जरूरी चीजों को, जरूरतमंदों तक पहुंचाएगी। कम्युनिटी लेवल पर डिस्ट्रीब्यूशन का लाभ उन्हें मिलता रहे, इसके लिए वहां पर सक्रिय एनजीओ को काम पर लगाएगी।

रिपोर्टिंग और चैरिटी के इस खर्च को आम जनता उठाएगी। क्राउडफंडिंग की राशि से ना सिर्फ मजदूरों गरीबों की आवाज उठाई जाएगी बल्कि इन जरूरतमंदों की जान बचाएगी ।

तीन तीन पत्रकारों की 5 टीम बनाई जाएगी। देशभर में 4 टीम भेजी जाएगी और दिल्ली में एक सेंट्रल टीम बनाई जाएगी ।

हर एक टीम में एक कैमरामैन एक रिपोर्टर और एक वीडियो एडिटर होगा। यानी IIMC जैसे श्रेष्ठ संस्थानों से Trained कुल 15 पत्रकारों को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी।

इनकी बुनियादी जरूरतों का न्यूनतम खर्च चार लाख रुपए प्रति महीना आएगा यानी इस काम मे लगी 5 टीमों के लिए 3 महीने तक रिपोर्टिंग का कुल न्यूनतम खर्च 12 लाख आएगा।


गौरतलब है कि 2 महीने के लॉक डाउन में पूरी तरह से टूटे और बिखरे मजदूरों को संभलने में कम से कम 3 महीने लगेंगे, वो भी तब जब मीडिया में उनकी आवाज बनी रहेगी।

इसके साथ ही रिपोर्टिंग के दौरान  संपर्क में आने वाले क्षेत्रों के मजदूर परिवारों के लिए  जागरूकता अभियान के तहत महिलाओं के लिए सेनेटरी नैपकिन। सभी के लिए सैनिटाइजर और मास्क। बच्चों के लिए स्कूल किट की व्यवस्था की जाएगी।

65 से 70 हजार प्रति महीने के हिसाब से हर एक टीम 3 महीने में 2 लाख की राहत किट पहुंचाएगी। यानी पांचो टीम मिलकर 10 लाख रुपए की राहत सामग्री भी पहुंचाएगी।

स्पष्ट है जनता के 22 लाख रुपए की क्राउडफंडिंग इसमें से मिलने वाली राशि को VidMo मीडिया फाउंडेशन के एकाउंट में Receive किया जाएगा।

 इस राशि से ना सिर्फ मजदूरों की आवाज उठाई जाएगी, ना सिर्फ उनके मुद्दे उठाए जाएंगे बल्कि उनको फौरी राहत भी पहुंचाई जाएगी।

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