एक दिन की चाय-सिगरेट का त्याग और लोकतंत्र की नई बुनियाद: 'निर्भीक इंडिया' को आपके सहयोग की ज़रूरत है
हमारी आवाज़, हमारा सच
हमारे हालिया सम्पादकीय—चाहे वह 'बिजली की मार' हो, 'अदृश्य गणित', 'आयात का बोझ' या फिर 'छुपा सेंसरशिप और गोदी तंत्र'—इन्हें एक बार ज़रूर पढ़िए। ये सिर्फ कागज़ पर छपे शब्द नहीं हैं, यह वह कड़वा सच और ज़मीनी दर्द है जिसे हम इस वक्त खुद महसूस कर रहे हैं।
आज के दौर में जहाँ मीडिया विज्ञापनदाताओं की कठपुतली बन चुका है, हम निर्भीक इंडिया के जरिए 4 पन्नों का एक ऐसा अखबार आप तक पहुँचा रहे हैं जिसमें एक भी विज्ञापन नहीं है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि बिना किसी कॉरपोरेट या सरकारी दबाव के, केवल शुद्ध, निष्पक्ष और जन-सरोकार से जुड़ी खबरें और विचार आप तक पहुँचें।
लक्ष्य बिना 'लक्ष्मी' के पूरा नहीं हो सकता
सच्ची और निडर पत्रकारिता का यह रास्ता काँटों भरा है। इस समय हम बेहद मामूली और सीमित संसाधनों (Infrastructure) के सहारे काम कर रहे हैं। सच को निरंतर छापने और अखबार के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए हमें एक बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जिसके लिए निर्भीक इंडिया को फिलहाल कम से कम ₹5 लाख की सख्त ज़रूरत है।
विचार कितना भी बड़ा, पवित्र या क्रांतिकारी क्यों न हो—वह 'लक्ष्य' बिना 'लक्ष्मी' के पूरा नहीं हो सकता।
एक दिन की चाय, सिगरेट या शराब का पैसा… लोकतंत्र के नाम
हम आपसे कोई बड़ी आर्थिक मदद नहीं मांग रहे, हम बस आपसे एक दिन का छोटा सा त्याग मांग रहे हैं:
- क्या आप हमारे लिए एक दिन की चाय का खर्च छोड़ सकते हैं?
- क्या आप एक दिन की सिगरेट या शराब जैसी आदतों पर होने वाले खर्च को रोककर वह पैसा देश की स्वतंत्र आवाज़ को दे सकते हैं?
आपका दिया हुआ ₹10, ₹20 या ₹50 का छोटा सा सहयोग जब हज़ारों हाथों से मिलेगा, तो ₹5 लाख का लक्ष्य बनते देर नहीं लगेगी।
मंदिरों में चढ़ावे से पहले विचार कीजिए—जवाबदेही कहाँ है?
मंदिरों में चढ़ावा देने या राजनीतिक दलों को चंदा देने से पहले एक बार ठंडे दिमाग से सोचिए। क्या मंदिर या कोई राजनीतिक दल आपके प्रति जवाबदेह (Accountable) है? नहीं।
लेकिन जब आप निर्भीक इंडिया जैसे स्वतंत्र अखबार को अपना सहयोग देते हैं, तो आपका यह दान "महादान" बनता है। क्योंकि यह अखबार हर एक शब्द, हर एक खबर और हर एक सम्पादकीय के लिए सीधे आपके प्रति जवाबदेह रहेगा।
बदलाव का आह्वान: कॉरपोरेट जगत और सजग नागरिकों से अपील
बतौर पत्रकार, मैं (संपादक नवनीत कुमार मिश्रा) देश के उन तमाम बुद्धिजीवियों, सजग नागरिकों और कॉरपोरेट जगत से भी अपील करता हूँ जो वाकई देश में पूर्ण लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना चाहते हैं। लगभग 80 सालों के इतिहास के बाद 'निर्भीक इंडिया' एक सोच, एक विचार और एक व्यवस्था-परिवर्तन का नाम बनकर आपके सामने खड़ा है। हमारे लेख पढ़िए, हमारी मानसिकता और निष्पक्षता को समझिए।
विचार करिए… निर्भीक इंडिया आपको एक सशक्त और स्वतंत्र मीडिया के निर्माण के लिए आमंत्रित करता है।
