Support Children of Mahendra Rana Sevak of Kailash Mansarovar Yatris | Milaap
Support Children of Mahendra Rana Sevak of Kailash Mansarovar Yatris
2%
Raised
Rs.1,50,102
of Rs.1,00,00,000
19 supporters
  • D&

    Created by

    Deviinder & Milind Kailash Mansarovar 2019 Batch13 Lipulekh
  • Ma

    This fundraiser will benefit

    Mayank and Ridhima

    from Ramnagar, Uttarakhand

Story

Content In English Follows:

महेंद्र सिंह राणा
(29 जून 1979 - 25 मई 2021)

महेन्द्र सिंह राणा बहुत ही ईमानदार, मेहनती, सरल और प्रकृति प्रेमी व्यक्ति थे, जो जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। उन्होंने गुंजी और कालापानी में प्रबंधक के रूप में कार्य करते हुए कई वर्षों तक यात्रियों के कई समूहों की सेवा की और बाद में दिल्ली से लिपुलेख दर्रे तक और वापसी यात्रा पर बैच यात्रा के लिए गाइड के रूप में काम किया। उन्होंने जिस किसी से भी मुलाकात की, उस पर उन्होंने तत्काल और स्थायी प्रभाव डाला। अपने नेतृत्व में उन्होंने यात्रा में जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए सभी की सहायता करने पर जोर दिया। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक यात्री को आराम देने और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि वे कठिन इलाके में यथासंभव आराम से रहें। जिन जगहों पर एक दिन भी बिताना मुश्किल होता है, वहाँ वे कई महीने बिताते थे, और अपने मिलनसार और अविस्मरणीय व्यवहार से सभी यात्रियों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ते थे।
       
जब वे यात्रियों की सेवा नहीं कर रहे थे तब उन्होंने बिनसर, नौकुचिया ताल और ढिकुली में कॉर्बेट नेशनल पार्क में सेवा की I  महेंद्र जी जैसे लोग पर्यावरण के उन सच्चे पहरेदारों में से एक थे, जिनका नाम भले ही बड़ा न हो, लेकिन उन्होंने पर्यावरण और जंगल के लिए बहुत बड़ा काम किया।

नवंबर 2020 में, उन्हें अपने पैतृक स्थान रामनगर में स्थानांतरित कर दिया गया। लेकिन नियति की योजना कुछ और ही थी I 25 मई 2021 को सारी योजनायें नियति की इच्छा के सामने परास्त हो गयीं I COVID-19 के कारण वे अपने सभी परिचितों और मित्रों को छोड़ कर अनन्त की यात्रा पर चले गये । एक सप्ताह तक उन्होंने बीमारी से संघर्ष किया किन्तु सभी के सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका । मित्रों और परिवार के लिए इस सत्य को स्वीकार करना बहुत कष्टदायक अनुभव था कि समुदाय का ऐसा सक्रिय सदस्य जो जरूरत के समय दूसरों की मदद करता था, वह खुद लाचार था और अपनी जान बचाने के लिए लड़ रहा था। दर्द की ये चलती फिरती तस्वीर हमारे दिलो दिमाग में हमेशा रहेगी. उन्हें हमेशा उनके शानदार काम के लिए याद किया जाएगा, क्योंकि महापुरुष कभी नहीं मरते, वे हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं।

महेंद्र जी ने कई वर्षों तक विभिन्न स्थानों और क्षमताओं में कैलाशियों की सेवा की थी, उन्होंने हमें जो अविस्मरणीय अनुभव दिये हैं, उनसे उऋण होना सम्भव नहीं है, किन्तु अब हम कैलाशी भाई-बहनों के सामने उनके दो छोटे बच्चों, मयंक और रिद्धिमा राणा के लिए कुछ करने की बारी है। सभी शिव भक्तों से अनुरोध है कि अपने इन बच्चों के लिए मुक्तहस्त से यथाशक्ति योगदान करें।

ओम नमः शिवाय। हर हर महादेव।।

Mahendra Singh Rana (29 June 1979 - 25 May 2021) was a very honest, hard-working, straightforward and nature-loving person who was always ready to help needy people.

He served many groups of yatris for many years while working as Manager at Gunji and Kalapani and later as a guide for batches yatra from Delhi to Dharachula to Lipulekh pass and on the return journey. He impressed everyone with his efficiency and gentlemanly demeanour. He made an immediate and lasting impression on anyone he met. Under his leadership, he stressed to all assisting in the yatra in helping those in need. He personally tried to comfort each yatri and ensure that they stay as comfortable as possible in difficult terrain. In places where it’s difficult to spend even a day, he used to spend several months and left an indelible mark in the hearts of all the yatris with his friendly and unique demeanour.

When he was not serving the yatris he served at Binsar, Naukuchia Tal and the Corbett National Park at Dhikuli

People like Mahendra Ji were one of those true watchdogs of the environment who may not have a big name but did a great job for the environment and the forest. He discharged his family and social responsibilities well throughout his life.

In  Nov 2020,  he got his relocation to his native Place Ramnagar. But destiny had something else in plan and his sudden expiry on 25th May 2021, due to COVID-19 has shocked all of his acquaintances no end. He fought valiantly for a week but lost his life despite everyone's best efforts. It was painful for friends and family to digest the fact that such an active member of the community who used to help others in their time of need was himself helpless and fighting to save his life. This moving picture of pain will always remain in our hearts and minds. He will always be remembered for his stellar work because great men never die, they just become immortal forever.

Mahendra Jii had served Kailashis for many years in different locations and capacities It's now the Kailashi brothers and sisters turn to do something for his two little children, Mayank and Riddhima Rana. All Shiva devotees are requested to make their wholehearted contribution with an open heart. For his children.

Aum Namah Shivay II Har Har Mahadev.

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