माहवारी की बात सबके साथ, जागरूकता कार्यक्रम एवं सैनेटरी पैड का वितरण
1 जनवरी 2014 से लगातार छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा संभाग सहित प्रदेश भर में माहवारी स्वचछता प्रबंधन पर निरंतर जागरूकता कार्यक्रम एवं किशोरी बालिका प्रशिक्षण के साथ-साथ आदिवासी बाहुल्य सरगुजा संभाग के स्कूलों में छात्राओं को निःशुल्क सैनेटरी पैड का वितरण किया जा रहा है। संस्था द्वारा अब तक 2500 से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों, संगोष्ठी, नुक्कड़, नाटक एवं स्वास्थ्य कैंप का आयोजन स्कूल, कॉलेजों, इंस्टिटयूट, महिला समूह के बीच, आंगनबाड़ी केन्द्रों सहित गांव व ग्राम पंचायत स्तर पर टोले-मोहल्ले में लगातार किया जा रहा है। जिसका सकारात्मक परिणाम यह देखने को मिला है कि महिलायें अब माहवारी जैसे विषयों पर बात करती हैं। पुरी तरह खुल कर स्वयं बात भले न रखें लेकिन यदि आपने इस पर पहल की तो वे खुल कर बातें रखने लगी हैं। इतना ही नहीं स्कूलों, कॉलेजों में भी छात्राओं के बीच इस पर खुल कर चर्चा हो रही है। वर्तमान में जनसहयोग की बदौलत लगभग 18,000 स्कूली छात्रायें, कॉलेज की छात्रायें और प्रशिक्षण केन्द्रों में निःशुल्क सैनेटरी पैड हम पहुंचा रहे हैं। इस दौरान प्रत्येक स्थानों पर डोनेट बॉक्स भी रखे गये हैं जिसमें छात्रायें एवं युवतियां अपने सामर्थय अनुसार 2 रूपये से लेकर 10 रूपये तक मदद देती हैं।
1 जनवरी 2014 से लगातार छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा संभाग सहित प्रदेश भर में माहवारी स्वचछता प्रबंधन पर निरंतर जागरूकता कार्यक्रम एवं किशोरी बालिका प्रशिक्षण के साथ-साथ आदिवासी बाहुल्य सरगुजा संभाग के स्कूलों में छात्राओं को निःशुल्क सैनेटरी पैड का वितरण किया जा रहा है। संस्था द्वारा अब तक 2500 से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों, संगोष्ठी, नुक्कड़, नाटक एवं स्वास्थ्य कैंप का आयोजन स्कूल, कॉलेजों, इंस्टिटयूट, महिला समूह के बीच, आंगनबाड़ी केन्द्रों सहित गांव व ग्राम पंचायत स्तर पर टोले-मोहल्ले में लगातार किया जा रहा है। जिसका सकारात्मक परिणाम यह देखने को मिला है कि महिलायें अब माहवारी जैसे विषयों पर बात करती हैं। पुरी तरह खुल कर स्वयं बात भले न रखें लेकिन यदि आपने इस पर पहल की तो वे खुल कर बातें रखने लगी हैं। इतना ही नहीं स्कूलों, कॉलेजों में भी छात्राओं के बीच इस पर खुल कर चर्चा हो रही है। वर्तमान में जनसहयोग की बदौलत लगभग 18,000 स्कूली छात्रायें, कॉलेज की छात्रायें और प्रशिक्षण केन्द्रों में निःशुल्क सैनेटरी पैड हम पहुंचा रहे हैं। इस दौरान प्रत्येक स्थानों पर डोनेट बॉक्स भी रखे गये हैं जिसमें छात्रायें एवं युवतियां अपने सामर्थय अनुसार 2 रूपये से लेकर 10 रूपये तक मदद देती हैं।
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हमारा यह प्रयोग और यह प्रोजेक्ट निरंतर सुचारू रूप से चलता रहे इसे ध्यान में रखते हुए हमने आगामी पांच वर्षों की कार्य योजना बनाते हुए 30प्रतिशत राशि नये सहयोगियों से जमा करने का निर्णय लिया है। ताकि इस प्रोजेक्ट को इस कार्य को हम सही तरिके से आगे भी चला सकें।
आप सभी का छोटा-छोटा सहयोग, थोड़ा सा समपर्ण हमारे इस कार्य को गति देगा। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि बेटियों के अच्छे स्वास्थ्य, अच्छे जीवन को लेकर संस्था द्वारा चलाये जा रहे इस प्रोजेक्ट में आप सहयोग कर हमें आगे बढ़ने में मदद करेंगे।
यह पुरा प्रोजेक्ट ही आप सभी के निरंतर सहयोग से ही सफल हो रहा है। कोविड-19 के आने के बाद सहयोग का क्रम थोड़ा रूका है पूर्व की तुलना में वर्तमान में लोगों द्वारा किये जाने वाले आर्थिक सहयोग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आयी है। हम भी यह मानते हैं कि कोविड के दौर में कई लोगों की नौकरी चली गई, कई लोगों के आय के साधन सीमित हो गये। किन्तु इन सब के बीच भी हम अपने जीवन नैया पर आगे बढ़ रहे हैं। यदि हम 100 रूपये का एक सहयोग किसी संस्था को कर दें तो मुझे लगता है कि कई बेटियों के जीवन और स्वास्थ्य को सुधारने में आप महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
हमारी संस्था सरगुजा साइंस ग्रुप एज्युकेशन सोसायटी, अम्बिकापुर के माध्यम से हम 1 जनवरी 2014 से लेकर अब तक निरंतर प्रोजेक्ट ईज्जत के तहत जागरूकता कार्यक्रम एवं निःशुल्क सैनेटरी पैड वितरण, स्वास्थ्य परीक्षण के साथ-साथ बेटियों और महिलाओं को आजिविका प्रशिक्षण के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। यह समस्त कार्य आप सभी दानदाताओं के निरंतर सहयोग से ही संभव हो सका है, यदि आप सब इसी तरह सहयोग करते रहें तो हम और भी बेहतर ढंग से कार्य कर सकेंगे।
Since 1 January 2014, continuous awareness programs on menstrual hygiene management, adolescent girls’ training, and free distribution of sanitary pads have been carried out across Chhattisgarh, especially in the tribal-dominated Surguja division. The organization has conducted over 2,500 awareness programs, seminars, street plays, health camps, and outreach activities at schools, colleges, institutes, women’s groups, anganwadi centers, villages, and panchayat levels. A positive change is visible—women are now more open to discussing menstruation, and students in schools and colleges actively participate in discussions.
Currently, with public support, around 18,000 school and college students and trainees receive free sanitary pads. Donation boxes are placed at each location, where girls contribute ₹2 to ₹10 as per their capacity.
To know more about us, visit our Facebook page:
https://www.facebook.com/Surgujasciencegroup
To ensure the smooth continuation of this initiative, we have prepared a five-year action plan and aim to raise 30% of the required funds from new supporters. Your small contribution and dedication can accelerate this work. We request your support for the health and well-being of girls through this project.
This entire project is successful only due to continuous public support. After COVID-19, contributions reduced by 30–40% due to job losses and income constraints. Even so, we continue moving forward. A contribution of just ₹100 can significantly improve the health and lives of many girls.
Through Surguja Science Group Education Society, Ambikapur, we have been implementing Project Izzat since 1 January 2014—conducting awareness programs, distributing free sanitary pads, providing health check-ups, and empowering girls and women through livelihood training. All of this has been possible because of our donors’ continued support, and with your help, we can do even better.
हमारा यह प्रयोग और यह प्रोजेक्ट निरंतर सुचारू रूप से चलता रहे इसे ध्यान में रखते हुए हमने आगामी पांच वर्षों की कार्य योजना बनाते हुए 30प्रतिशत राशि नये सहयोगियों से जमा करने का निर्णय लिया है। ताकि इस प्रोजेक्ट को इस कार्य को हम सही तरिके से आगे भी चला सकें।
आप सभी का छोटा-छोटा सहयोग, थोड़ा सा समपर्ण हमारे इस कार्य को गति देगा। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि बेटियों के अच्छे स्वास्थ्य, अच्छे जीवन को लेकर संस्था द्वारा चलाये जा रहे इस प्रोजेक्ट में आप सहयोग कर हमें आगे बढ़ने में मदद करेंगे।
यह पुरा प्रोजेक्ट ही आप सभी के निरंतर सहयोग से ही सफल हो रहा है। कोविड-19 के आने के बाद सहयोग का क्रम थोड़ा रूका है पूर्व की तुलना में वर्तमान में लोगों द्वारा किये जाने वाले आर्थिक सहयोग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आयी है। हम भी यह मानते हैं कि कोविड के दौर में कई लोगों की नौकरी चली गई, कई लोगों के आय के साधन सीमित हो गये। किन्तु इन सब के बीच भी हम अपने जीवन नैया पर आगे बढ़ रहे हैं। यदि हम 100 रूपये का एक सहयोग किसी संस्था को कर दें तो मुझे लगता है कि कई बेटियों के जीवन और स्वास्थ्य को सुधारने में आप महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
हमारी संस्था सरगुजा साइंस ग्रुप एज्युकेशन सोसायटी, अम्बिकापुर के माध्यम से हम 1 जनवरी 2014 से लेकर अब तक निरंतर प्रोजेक्ट ईज्जत के तहत जागरूकता कार्यक्रम एवं निःशुल्क सैनेटरी पैड वितरण, स्वास्थ्य परीक्षण के साथ-साथ बेटियों और महिलाओं को आजिविका प्रशिक्षण के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। यह समस्त कार्य आप सभी दानदाताओं के निरंतर सहयोग से ही संभव हो सका है, यदि आप सब इसी तरह सहयोग करते रहें तो हम और भी बेहतर ढंग से कार्य कर सकेंगे।
Since 1 January 2014, continuous awareness programs on menstrual hygiene management, adolescent girls’ training, and free distribution of sanitary pads have been carried out across Chhattisgarh, especially in the tribal-dominated Surguja division. The organization has conducted over 2,500 awareness programs, seminars, street plays, health camps, and outreach activities at schools, colleges, institutes, women’s groups, anganwadi centers, villages, and panchayat levels. A positive change is visible—women are now more open to discussing menstruation, and students in schools and colleges actively participate in discussions.
Currently, with public support, around 18,000 school and college students and trainees receive free sanitary pads. Donation boxes are placed at each location, where girls contribute ₹2 to ₹10 as per their capacity.
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To ensure the smooth continuation of this initiative, we have prepared a five-year action plan and aim to raise 30% of the required funds from new supporters. Your small contribution and dedication can accelerate this work. We request your support for the health and well-being of girls through this project.
This entire project is successful only due to continuous public support. After COVID-19, contributions reduced by 30–40% due to job losses and income constraints. Even so, we continue moving forward. A contribution of just ₹100 can significantly improve the health and lives of many girls.
Through Surguja Science Group Education Society, Ambikapur, we have been implementing Project Izzat since 1 January 2014—conducting awareness programs, distributing free sanitary pads, providing health check-ups, and empowering girls and women through livelihood training. All of this has been possible because of our donors’ continued support, and with your help, we can do even better.