Freeing a trafficking victim is a Muslim's religious obligation | Milaap
Freeing a trafficking victim is a Muslim's religious obligation
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Rs.17,725
of Rs.2,00,000
13 supporters
  • Shafiq

    Created by

    Shafiq R Khan
  • EP

    This fundraiser will benefit

    EMPOWER PEOPLE

    from New Delhi, Delhi

80G tax benefits for INR donations

Dear Friends,
This Campaign was launched as "FREE A TRAFFICKING VICTIM THIS RAMZAN" as we have already passed the month without reaching our goal of fund raising. we are staying with the campaign for few more days. 

Please share and ask your family and friends for making contribution as your religious duty and also please propagate it among people so they would be aware of menace of trafficking and their role being Muslim. 

"The blessed month of Ramadan has started - may Allah bestow His mercy and blessings on you and your families. Month of Ramzan is known for charity, the third pillar of Islam and Muslims have spiritual obligations to pay their Zakat, Sadaqah, Fidya or Kafarah this month. Other charities are almost a person's will but Zakat is necessary for the people's own assets and properties. Quran has designated eight categories of reason which are zakatable. freeing captives [or slaves] is one of those (see Quran-9:60).

Being a member of community I have seen people donating their Zakat for many purposes except freeing captives or slaves just because many of them believe that slavery doesn't exist on this planet which is factually wrong, the slavery has changed its form but it still is live and intense more than ever....

In 2006, I had established an organization, which is working to rescue and rehabilitate trafficked girls and helping communities to lift themselves out of poverty through education, training and supportive livelihoods.

I have started a fund raising to ask for your contribution.  You can help us in liberating women in slavery and those who are desperately in need of support as Quran says 

Did we not show him the two paths? He should choose the difficult path. Which one is the difficult path? The freeing of slaves. Feeding, during the time of hardship... Quran [90:10-14]
and also
Righteousness Righteous are those who believe in God, the Last Day, the angels, the scriptures, and the prophets; and they give the money, cheerfully, to the relatives, the orphans, the needy, the traveller, the beggars, and to free slaves ... [Surah Al Baqarah 2: 177]

Freeing slaves and captives is your religious obligation
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बरकतों का महिना रमजान शुरू हुआ है—अल्लाह आप और आपके परिवार को अमन ओ अमान और अपनी दया नवाज़े. जैसा आपको पता है की रमजान कल्याणकारी कामो के लिए जाना जाता है जो की इस्लाम धर्म का तीसरा सबसे महत्वपूर्ण स्तम्भ है और हर मुस्लमान का धार्मिक कर्त्तव्य है की वो ज़कात फिदया सदका और कफारा निकाले और ज़रुरात्मंदो को दे. ज़कात के अलावा और तमाम तरह के कल्याणकारी कार्य एक प्रकार से स्थिति और परिस्थिति पर निर्भर करता है मगर ज़कात हर साहिब इ निसब के लिए ज़रूरी है. कुरान शरीफ ने ज़कात को आठ प्रकार के कामो में लगाने निर्देश दिया है उनमे से एक है गुलामो को आज़ाद कराना और गुलामो को आज़ाद कराने के लिए गुलाम व्यक्ति की ओर से पैसे चुकाना यानी आज़ादी खरीदना (कुरान 9: 60)
मुस्लिम समुदाय का सदस्य होने के कारण मैंने देखा है की लोग ज़कात को उन तमाम कामो में इस्तेमाल करते हैं जो कुरान ने बताया है सिवाय गुलामो को छुडाने के अलावा. इसकी सबसे बड़ी वजह है की समुदाय के लोग समझते हैं की अब दुनिया में गुलाम होते ही नहीं जो की सच नहीं है. गुलामी प्रथा अब भी है और येपहले से कहीं ज्यादा है मानव तस्करी यानी इंसानों की खरीद फरोख्त उनमे से एक है.
2006 में मैंने एक संगठन बनाया था जो लगातार मानवतस्करी से लोगो को मुक्त करने और उनकी आज़ाद ज़िन्दगी को बेहतर बनाने का काम कर रहा है.

मैं आपसे आपकी भागीदारी की उम्मीद रखता हूँ ना सिर्फ आपके पैसों की बल्कि आपके ध्यान और ज़िम्मेदारी की भी ताकि जब आप अगली बार जब किसी अख़बार में किसी भी इंसान के ख़रीदे या बेचे जाने की खबर पढ़े तो आपको याद रहे की कुरान ने क्या कहा है

.......क्या तुम्हें दो रास्ते नहीं दिखाए गए ? तुम्हें कठिन मार्ग चुनना चाहिए. ये कठिन मार्ग क्या है ? गुलामो को आज़ाद करना/कराना..... कुरान (90:10-13) 

इसके अलावा कुरान कहता है 

नेकी कुछ यही थोड़ी है की नमाज़ में अपने मुंह पूरब या पश्चिम की तरफ कर लो बल्कि नेकी तो उसकी है जो खुदा और रोज़े आखिरत और फरिश्तों और खुदा की किताबो और पैगम्बरों पर इमान लाये और उसकी उल्फत में अपना माल करबतदरो और यतीमो और मुहतजो परदेसियों और मांगने वालो और गुलाम बना ली गई लड़कियों की मुक्ति के लिए खर्च करे . और पाबन्दी से नमाज़ पढ़े और ज़कात देता रहे और अगर कोई वादा किया है तो उसे पूरा करे फक्र व फाका रंज और घुटन के वक़्त साबित क़दम रहे यही वो लोग हैं जो दावाए ईमान में सच्चे निकले और यही लोग परहेजगार हैं (सुरह बकरा 177)



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