कन्यादान सर्बोच्च दान (आइये इनके आँसू पोछें )

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Story

सुभाष शर्मा जी बेहद सीधे साधे सरल व मीठे स्वभाव के व्यक्तित्व के इन्सान है. .पढाई लिखाई भी किया पर दुर्भाग्य ही है बिचारे की नौकरी कहीं नहीं लगी.गरीबी के कारण कोई बिजनेस भी सम्भव ना हुआ..शादी हो चुकी थी तो एक के बाद एक चार बेटियाँ होती गई . किराये पर रहन सहन व परिवार का खर्च सभी को लेकर बहुत परेशान रहते थे..
फिर ईश्वर की कृपा हुई और एक मसीहा जैसे इन्सान से मुलाकात हो गई जो एक फैक्ट्री के मालिक व उनकी पत्नी एक अच्छी डाॅक्टर हैं साथ ही वो बडे नेक विचार के दम्पत्ति हैं
सो उन्होने सुभाष जी के लिये एक नई राह बनाई..कुछ पैसे खर्च करके एक रेलवे पटरी के किनारे पीपल के पेड की छाँव के नीचे अपनी फैक्ट्री के पास ही चाय की दुकान खुलवा दिया .
कुछ वक्त और बीता तो फिर थोडी मदद की और एक लकडी का खोखा बनवा दिया और कुछ बिस्कुट वगैरह भी मुहैया करा दिये सो इस तरह रोटी चलने लगी.
पर बेटियाँ स्कूल जाने लगी खर्च बढता गया..
बीच में एक शख्स ने सस्ता प्लाट दिलाने के बहाने बिचारे की गाढी कमाई से इकट्ठे किये कुछ पैसे थे उन्हे ले भागा..
एक बार और कोई पैसे दोगुना करने का झाँसा दे कर ले भागा..बिचारे चुप भगवान भरोसे बैठे रहे..                           बेटियाँ बडी होती गईं पर दोनो पती व पत्नी सुबह 3 बजे से रात 11-12 बजे तक  मेहनत करके बडी बहादुरी से बेटियों को पढाते लिखाते रहे ..
पर हमारे समाज में कुछ लोग एेसे भी होते है जिनके पेट भरे होते हैं पूरा वख्त खाली होता है इधर उधर खुराफात के लिये..सो उनके ग्रुप को उस पीपल के नीचे पत्ते खेलना था…   सो उन्होने प्रसासन में किसी जानने वाले से कहकर पहले बिचारे का खोखा ही तुडवा देना चाहा पर कामयाब ना हो पाये.. फिर बिचारे का चाय का खोखा कई लोग मिलकर सभी उठा कर धूप में रख दिया व एक तखत डालकर वहाँ पत्ते खेलने लगे सो ग्राहक भी कम हो गये. उनसे मुलाकात हुई तो मुझे गिलास में चाय डालते उनके आँसू गिर गये और एक बूँद चाय में जा गिरा.. मैने उन्हे सिर्फ एक बात कहा कि जब हम कोई बात चुप रहकर सुन लेते हैं तो उसका जवाब ईश्वर देता है और मै वो चाय आँसुओं के साथ पी गया.            
पीते पीते उनकी दो बडी बेटियाँ रोटी लेकर आयीं तो देखा के दो बेटिंयाँ शादी लायक हो गई हैं..पूछने पर फिर आँसू छलक गये और बडे धीरे से बोले यही सबसे बडी चिन्ता की वजह हैं..
बस मै चाय पीते पीते इनके आँसुओं को पोछने की कसम खाता गया ..
क्या आप केवल एक रूमाल दे सकते हैं हमें
आइये इनके आँसू पोछें व साथ ही एक निर्बुद्धि समाज को भी सबक दें जिनका दया, धर्म, शील से दूर तक कोई वास्ता नहीं..
आगै आयें दानों में कन्यादान सर्बोच्च माना गया है.. अनुरोध स्वीकार करें..
सधन्यवाद
प्रार्थी
Subhash Sharma is a very simple and straightforward personality person. It is unfortunate that the job of the poor has not taken anywhere. Due to poverty, no business has been possible. If it had been done, then there were four daughters after one. Bearings on rent and family expenses were all very upset about them.
Then God was pleased and met like a messiah like a man who owns a factory and his wife is a good doctor, he is also a couple of great good thoughts.
So he made a new path for Subhash ji .. Spending some money opened a tea shop near his factory under the roof of a peepal tree on the side of a railway track.
After some time, he helped a little bit and made a wooden lizard and provided some biscuits and so on. So the bread started running like this.
But the expenses of going to school girls increased.
In the middle of a man, there was some money collected by earning a fortune to get a cheap plot.
One more time to double another money, take a blinking blow..bitchare silent God was sitting confidently. The daughters became very big, but both husbands and wives used to bravely teach daughters to them from 3 am to 11 pm keep working heard
But in our society there are some people who are full of stomach, all the stomachs are empty, for the sake of hoaxes..So their group had to play the cards under that peepal ... so they told the first person, The Khoka wants to tumble but can not be successful. Then the dish of the dish of the tea many people gathered and put all in the sun and put a plaque and start playing cards there. Have diminished. When he met me, he put tea in the glass, his tears fell, and a drop of tea went into the tea. I told him only one thing that when we listen silently and listen to it, God answers his answer and I say that the tea tears Drank with..
After drinking his two elder daughters came with bread, two sons of Sage have got married. Then after tears, the tears were spilled and they spoke loudly, this is the reason for the biggest worry.
Just drinking tea, I swore to tear their tears.
Can you just give a handkerchief to us
Come, let's tear their tears, and simultaneously teach a unmistakable society that is not far from the mercy, religion, and shil.
Agayi Ayans donation is considered as the highest child sacrifice.. Accept the request..
kind regards
Petitioner

Prashant Tripathi
कन्यादान सर्बोच्च दान Please help Subhash and his Family
कन्यादान सर्बोच्च दान Please help Subhash and his Family

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