Help Students in Rural Bihar to Have Quality Education and Sillks | Milaap
Help Students in Rural Bihar to Have Quality Education and Sillks
10%
Raised
Rs.15,501
of Rs.1,60,000
5 supporters
  • Manoj

    Created by

    Manoj Kumar
  • SO

    This fundraiser will benefit

    Students Of Rural Bihar

    from Gaya, Bihar

Story

In today's digital world, especially after COVID-19, most of the education-related activities are happening online. Learning resources from all over the world are just a click away, but students are helpless due to the lack of digital infrastructure. Students and teachers will be empowered by our projects (listed at the bottom).
Hi!
I am Manoj, despite my reduced mobility (due to Locomotor Disability), I lead a school in Bahadur Bigha and a coaching institute 3 km away in Kujap (villages in the Gaya district of Bihar). There are 100 underprivileged children (pre-nursery to V) in the school and 80 children (from V to X) in the coaching. The parents of most children are daily wage laborers, small farmers, or casual workers. As most of the students enrolled in the school and the coaching institute come from marginalized backgrounds, the tuition fees are kept low- Rs.200 per month for school children and Rs.300 per month for coaching. The school’s name is M.S Gyanoday High School and the coaching’s name is M.S. Coaching Centre.  

I never let my disability stand in my way to provide quality education to the children.  Currently, four teachers are employed in the school and three teachers in the coaching institute. The teachers are providing the best services they can despite the difficult financial circumstances. With the aim of giving better modern education to the children, we conduct many activities such as regular visits to Gaya Public Library, student cultural meets, low-cost science experiments inspired by ‘Padam Sri’ Arvind Gupta, free book distribution, art competition, etc. Apart from all this, I have always strived for the upliftment and empowerment of fellow persons with special needs. I have also been honored with the 'Samarthya Award' by CBRF NGO, Bangalore in 2018 for excellence in empowerment works. Please click on the link to view the award nomination video. https://youtu.be/S04d0sfZ6SQ

(Some more photos are attached below.)
After the advent of Covid-19 and the lockdown, there has been a significant impact on the income of the parents of our children, which is also affecting our education. After the lockdown, income inequality has increased and the working class is suffering more. We are well aware of this fact, which is why we do not want to give up. Instead, we want to work with more energy and spirit to shape the present and the future of our students.

For this purpose, after the 2nd wave, we are upgrading to modern. Some friends together established a 'library and a science lab cum reading room' named 'Pustak Ghar' in village Bahadur Bihga in Gaya, Bihar. Pustak Ghar has some 500 books, a laptop, and some items that have been arranged for Low-Cost Science Experiments.
As the next step in this direction, we want to execute some more small projects for which we need your help. Some of the proposed projects are as follows –
  • Adding more books to the ‘Pusthak Ghar’ library. 
  • Setting up a computer lab with 4-5 laptops or desktops with internet connection. 
  • Buying a projector for better reading with Audio-Visual
  • Buying a printer.
  • Developing a formal science lab in the low-cost science activity space by adding more equipment.
  • Set up another unit of Pustak Ghar in the nearby village if there is some money left.

Help us by donating any amount. No amount will be small for such a noble cause.
Thank you!


आज के डिजिटल दुनिया में, खासकर COVID-19 के बाद, शिक्षा संबंधी ज्यादा तर चीजें ऑनलाइन हो रही हैं। दुनिया भर में मौजूद शिक्षण श्रोत एक क्लिक की दूरी पर उपलब्ध हैं, पर  डिजिटल इनफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में हमारे विध्यार्थी असहाय हैं। हमारे इन प्रोजेक्ट्स से (सबसे नीचे अंकित हैं) विध्यार्थि और शिक्षक सशक्त होंगे।
 
नमस्ते!

मैं मनोज हूं, मेरे चलन अक्षमता (Locomotor Disability) के बाबजूद, मैं बिहार के गया जिले के एक गांव बहादुर बीघा में एक स्कूल और 3 KM दूर गांव कुजाप में एक कोचिंग संस्थान का नेतृत्त्व करता हूं। स्कूल में 100 (प्री-नर्सरी से V) तक के वंचित वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं, और 80 बच्चे (V से X तक) कोचिंग में पढ़ रहे हैं। अधिकांश बच्चों के माता-पिता दिहाड़ी मजदूर, छोटे किसान या श्रमिक हैं। चूंकि स्कूल और कोचिंग संस्थान में नामांकित अधिकांश छात्र हाशिए की पृष्ठभूमि से आते हैं, इसलिए शिक्षण शुल्क कम रखी गयी है- स्कूली बच्चों के लिए 200 रुपये प्रति माह और कोचिंग के लिए 300 रुपये प्रति माह। स्कूल का नाम एम.एस. ज्ञानोदय हाई स्कूल और कोचिंग का नाम एम.एस. कोचिंग सेंटर है।

मैंने मेरे चलन-अक्षमता को कभी भी हम बच्चों को बेहतर शिक्षा के रास्ते का रोड़ा नहीं बनने दिया। वर्तमान में स्कूल में चार शिक्षक और कोचिंग संस्थान में तीन शिक्षक कार्यरत हैं। कठिन वित्तीय परिस्थितियों के बावजूद शिक्षक सर्वोत्तम सेवाएं प्रदान करने में प्रयासरत हैं। बच्चों को बेहतर गुणवत्ता वाली शिक्षा देने के उद्देश्य से हम कई क्रियाकलप करते रहते हैं। कुछ मुख्य कार्यक्रम- गया पब्लिक लाइब्ररी का नित्य भ्रमण, छात्र समागम, ‘पदम श्री’ अरविंद गुप्ता से प्रभावित 'लो कोस्ट साइन्स प्रयोग', पुस्तक वितरण, आर्ट प्रतिस्प्रधा इत्यादि हैं। इनसब के अलावा मैंने अपने दिव्याङ्ग भाई बहनों के उत्थान और सशक्तिकरण के लियर सदा ही प्रयासरत रहा हूँ।  मेरे निरंतर प्रयत्नों व सशक्तिकरण कार्यों में उत्कृष्ठता के लिए 2018 में बंगलुरु के CBRF NGO द्वारा 'सामर्थ्य अवार्ड' से भी सम्मानित किया गया हैं। कृपया लिंक पर क्लिक करके अवार्ड के बारें में देखें।
https://youtu.be/S04d0sfZ6SQ
 
(कुछ और फोटोस नीचे संलग्न हैं।)
Covid-19 के आगमन और Lockdown के बाद हमारे बच्चों के अभिभावकों की आमदनी पर खासा प्रभाव पड़ा है, जिसका असर हमारे शिक्षण पर भी पड़ रहा है। लॉकडाउन के बाद 'आय असमानता' बढ़ी है और मजदूर वर्ग अधिक पीड़ित है। हम इस बात से भलीभती अवगत है इसीलिए नीतिगत कारणों से पड़ रही मार के आगे हम हारना नहीं चाहते तथा और अधिक ऊर्जा के साथ काम कर, अपने विध्यार्थियों के भविष्य और वर्तमान को संवारना चाहते हैं।

इसी उद्देश्य से 2nd Wave के बाद हम कुछ मित्र मिलकर एक 'लाइब्ररी और एक साइन्स लैब कम रीडिंग रूम' की स्थापना की। हमनें इसका नाम 'पुस्तक घर' दिया है। इसमें कुछ 500 किताबें, एक लैपटाप और ‘Low-Cost Science Experiments’ के लिए कुछ ज़रूरी वस्तुयों का प्रबंध किया है।

इसी दिशा में अगले कदम के तौर पर हम कुछ और छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स करना चाहते हैं जिसके लिए हमें आपकी मदद की आवश्यकता है। कुछ प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स निम्नलिखित हैं –
·         पूर्व-स्थापित लाइब्ररी (पुस्तक घर) मे कुछ और पुस्तकें जोड़ना
·         इंटरनेट और 4-5 लैपटाप या डेस्क टॉप वाली एक कम्प्युटर लैब स्थापित करना
·         औडियो-विज्वल की मदद से बेहतर पठन-पाठन के लिए एक Projector खरीदना
·         एक  प्रिंटर खरीदना। 
·         लो- कोस्ट साइन्स एक्टिविटी स्पेस में कुछ और समान और उपकरण जोड़कर इसे एक सुदृढ़ साइन्स लैब के रूप में विकसित करना

·     और अगर कुछ धन राशि बची तो पास के गाँव में पुस्तक घर की एक और इकाई स्थापित करना।
 
कोई भी धन राशी दान कर हमारी मदद करें, नेक कार्य के लिए दिया गया कोई भी दान छोटा नहीं होता। 
धन्यवाद!

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