Help Amit Kumar Negi fullfill Him Kangchenjunga (8,586 m) Expedition | Milaap
Help Amit Kumar Negi fullfill Him Kangchenjunga (8,586 m) Expedition
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  • Amit Kumar

    Created by

    Amit Kumar Negi
  • Ak

    This fundraiser will benefit

    Amit kumar Negi

    from Kinnaur, Himachal Pradesh

Story

27 year old Amit Kumar Negi hails from a lower income family from a small village Batseri in Kinnaur Himachal Pradesh India and in May 2021 become first civilian of Kinnaur Himachal Pradesh to conquer World Highest mountain Everest in new Hight 8848.86m.
 
Mission Kanchenjunga Peak 8586m
Kanchenjunga is the highest mountain peak in India and ranked 3rd highest peak in the world with an elevation of 8,586 m (28,169 ft). It is situated at the ...


ऐवरेस्ट अभियान 2021:- आज हम आपके साथ ऐवरेस्टर अमित कुमार नेगी जी के जीवन की कुछ बातें बताएंगे,कि कैसे ऐवरेस्टर अमित कुमार नेगी जी ने कड़े परिश्रम किया और उसी कड़े परिश्रम के कारण आज उन्होंने ये मुकाम हासिल किया।
अमित कुमार नेगी जी का ऐवरेस्टर अमित कुमार नेगी बनने तक का सफर कैसा रहा और जीवन में उन्होंने ने ऐवरेस्टर बनने तक कितना संघर्ष किया आज हम आप सब के साथ वो सब सांझा करेंगे।
अमित कुमार नेगी जी को बचपन से खेलों का बहुत शौक था।अमित कुमार नेगी जी ने अपने कैरियर की शुरुआत एक एथलिट बन के की। जिसमें उन्होंने स्कूल के समय से ही बहुत से खेलों में हिस्सा लेना शुरु किया। अमित कुमार नेगी जी ने सभी दौड़ो में भाग लिया पर अमित कुमार नेगी जी को कुछ और ही करना था सभी से हट के, घर में भी किसी को पता नहीं था कि अमित कुमार नेगी जी का लक्ष्य आखिर है क्या ? कुछ समय तक तो अमित कुमार नेगी जी खुद अपने जीवन के लक्ष्य कोे लेके काफ़ी असमंजस में थे। क्योंकि अमित कुमार नेगी जी की पढ़ाई में ज्यादा रुचि ना होने के कारण अमित कुमार नेगी जी ने खेलों की तरफ ज्यादा ध्यान देना शुरू किया ।इसके बाद अमित कुमार नेगी जी ने सोचा कि क्यों ना सभी खेलों में एक बार हिस्सा लिया जाए। इसी विचार-विमर्श करने के बाद  अमित कुमार नेगी ने हर एक खेलो में बढ़-चढ़ कर भाग लेना शुरू किया। इसी के साथ अमित कुमार नेगी जी ने वॉलीबाल खेलना शुरू किया जिसमें उन्हें काफी कामयाबी हासिल हुई।
अमित कुमार नेगी ने जिला स्तर, राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर तक वॉलीबाल में बहुत नाम कमाया और बहुत से पुरस्कार जीते। स्कूल टूर्नामेंट के बाद अमित कुमार नेगी जी ने हर हर गांव व पंचायत स्तर में हिस्सा लेना शुरू किया औऱ इसमें भी उन्होंने बहुत से पुरस्कार जीते। इसी के साथ अमित कुमार नेगी की प्लस टू की पढ़ाई भी पूरी हो गयी थी।
इसके बाद अमित कुमार नेगी जी ने सोचा कि गॉव में रहकर कुछ नहीं होना। कुछ करना  है तो गांव से बाहर निकलना पड़ेगा। इसके बाद अमित कुमार नेगी जी ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई Govt Degree Collage कोटशेरा से  की। कॉलेज के समय में भी अमित कुमार नेगी जी ने अपना वॉलीबाल का खेल भी जारी रखा और शिमला में रहकर अमित कुमार नेगी जी ने सबसे ज्यादा अपने फ़िटनेस पर ध्यान देना शुरू किया और उन्होंने शिमला में प्रसिद्ध  खेल परिसर राजीव गांधी खेल परिसर में अपनी वॉलीबाल का अभ्यास करने लगे। Govt डिग्री कॉलेज कोटशेरा शिमला से स्नातक करते हुए। पहली बार  नार्थ ज़ोन  All India Inter University Kolhapur Mumbai में पहली बार कोटशेरा कॉलेज के लिए Gold मैडल जीताया। उसी समय अमित कुमार नेगी जी  NCC से भी जुडने की सोची। NCC में जुड़ने के बाद ही पहली बार उनका ध्यान पर्वतरोहण की तरफ गया। कॉलेज समय मे जब पहली बार NCC प्री-ऐवरेस्ट के लिए, पहली बार पूरे भारत से,पहली बार NCC की ओर से ऐवरेस्ट के लिए भर्तियां निकली । अमित कुमार नेगी जी कहते है कि  तो मैंने भी सोचा क्यों ना कुछ अलग किया जाए। यही सोच कर मैंने NCC प्री- ऐवरेस्ट के लिए अपना नाम दे दिया। NCC प्री -ऐवरेस्ट की भर्ती के लिए मैंने पूरा प्रयास किया पर दुर्भाग्यवश यहाँ मेरा  चयन टॉप-5 में आने के बाद भी मेरा चयन नही हुआ। क्या पता उस समय मेरी किस्मत में ऐवरेस्टर बनना नहीं लिखा था। पर मैंने हार नहीं मानी और सोचा अगली बार पूरी तैयारी के साथ इस मिशन को पूरा करूँगा। और इसी बीच मैनें पर्वतरोहण कोर्स करना शुरु किया। जिससे मैंने अपनी शुरुआत की और अपना Basic Mountaineering Course (NIM) NEHRU INSTITUTE OF MOUNTAINEERING उत्तराखंड इंस्टीट्यूट से पूरा किया और Advance Mountaineering Course मैंने   National Institute of Mountaineering and Allied Sports (NIMAS) अरुणाचल प्रदेश से किया । इस बीच मैंने बहुत सी चोटियों को फ़तह किया और अपना MoI Instructor का कोर्स The Jawahar Institute of Mountaineering and Winter Sports (JIM & WS) पहलगाम(j&k)से किया। सब पर्वतरोहण कोर्स पूरे करने के बाद मैंने Search And Rescue कोर्स भी पूरा कर दिया। उसके बाद मैंने सर्दी में Alpine कोर्स भी किया।
अमित कुमार नेगी जी कहते है कि मैंने पर्वतरोहण के साथ अपने खेलों को भी नहीं छोड़ा और स्पोर्ट्स खेलते रहा। इसी बीच Running And Living Company किन्नौर में मैराथन आयोजन करते थे । तो मैंने सोचा क्यों ना इस मैराथन में भाग लिया जाए। यही सोच के मैंने पहली बार 42 कि. मी. मैराथन में हिस्सा लिया। जो किन्नौर बटसेरी गॉव के बंजारा कैम्प ने आयोजित हुआ था। इस मैराथन में मैंने पहली बार Gold मैडल जीता था जो कि 42कि. मी. की रेस थी। जब मैंने इस मैराथन में स्वर्ण पदक जीता तब मेरा विश्वास  और बढ़ गया और सोचने लगा ।
इसके बाद मैंने मनाली में Deo टिब्बा पर्वत फ़तह की। इसी क साथ मुझे पता चला कि हिमालयन मैराथन फिर से Running And Living Company किन्नौर के बटसेरी  गॉव में आयोजित कर रहे है। मैंने सोचा मैं फिर से इस मैं हिस्सा लूँगा। इसी के साथ मैंने दूसरी बार हिमालयन मैराथन जोकि 42कि. मी. थी उसमें फिर से स्वर्ण पदक जीता,जोकि मेरे लिए ये उपलब्धि दूसरी बार थी।  परन्तु इस मैराथन से मुझे कुछ अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिल पायी । तो बाद में मैंने पर्वतरोहण में ही अपना भविष्य चुना। 2020 में मुझे दूसरी बार IMF Massif ऐवरेस्ट अभियान में मौका मिला। परन्तु कोरोना के कारण  हम 2020 में ऐवरेस्ट अभियान में जा नहीं पाए और ऐवरेस्ट अभियान कोरोना के चलते कैंसिल हो गया। परन्तु 2021 के शुरुआती में उम्मीद फिर से जागी और पता चला कि पिछले साल का ऐवरेस्ट अभियान इस साल होगा। तो मैंने अपनी तैयारी फिर से शुरु की मैं इस साल मौके को छोड़ना नहीं चाहता था। हमने IMF से शुरु किया और भारत से काठमांडू का सफर काफी अच्छा रहा। काठमांडू पहुँचते ही हमारी एजेंसी ने हमें रिसीव किया और उसके बाद सभी शेरपा से परिचय हुआ। उसके बाद हमारी यात्रा लुकला विश्व के सबसे ऊंचे एयरपोर्ट और सबसे खतरनाक एयरपोर्ट से हमारी ट्रैकिंग शुरू हुई।
 उसके बाद हमने लोबचे ईस्ट 6,119 Mtr पर्वत  की चढ़ाई की। वहाँ से मैंने ऐवरेस्ट पर्वत को पहली बार देखा। बहुत ही सुंदर और बेस कैंप पूरा गॉव जैसा लग रहा था। ऊपर से लेकर नीचे तक कैम्प ही कैम्प।इसके बाद हम अगले दिन बेस कैम्प पहुँचे और यहाँ कुछ दिन आराम किया। क्योंकि आगे कुम्बू ice doctor ऐवरेस्ट के लिए रास्ता बना रहे थे और हमें कुम्बू ग्लेशियर से बहुत बुरी खबर मिली कि कुम्बू ग्लेशियर में एक शारपा की मौत हो गई। ये सुनकर हमें बहुत ज्यादा दुःख हुआ और रोज कुम्बू ग्लेशियर को देख कर डर भी लग रहा था। क्योंकि हमने आगे कैम्प-3 तक उसी रास्ते से जा के आना था।क्योंकि ये बहुत ज्यादा जरूरी होता है जब कोई 8 हजार मीटर से ऊपर पर्वत चढ़ने से पहले अभ्यास करना बहुत जरूरी होता है और वो दिन आ ही गया जिस दिन हमें कुम्बू ग्लेशियर से ऊपर जाना था। हमने पहली बार कुम्बू ग्लेशियर से ऊपर जाने की कोशिश की,लेकिन आगे ladder टूट जाने से हम आधे से सुरक्षित वापिस आ गए। कुछ दिन बेस कैम्प में इंतजार करने के बाद फिर से हम कुम्बू ग्लेशियर से होते हुए हम कैम्प-3  जाकर वापिस आ गए । उसके बाद हम अच्छे मौसम का इंतजार करने लगे। इसके बाद हम 23 और 24 मई को ऐवरेस्ट फ़तह करने के लिए अपना मिशन शुरू किया। लेकिन ऊपरवाले को ये दिनांक शायद पसन्द नहीं आया आई या यूं कह लो कि हमारी किस्मत में इस दिन ऐवरेस्ट फ़तह करना लिखा नहीं था। उसी दिन हम कैम्प-3 से थोड़ा सा ऊपर ही गए थे अचानक मौसम खराब हो गया और 50-60 कि. मी. की रफ्तार से हवाएं चलना शुरू हो गई। मैंने ये नज़ारा अपनी आँखों से जिंदगी में पहली बार देखा । इतनी तेज हवाओं के चलने से वहाँ पर बहुत सारे टेंट तबाह हो गए। इसके बाद हम कैम्प-2 वापिस आ गए और वहाँ 24 से 29 तक मौसम साफ होने का इंतजार करते रहे। इसी बीच 24 से 29 तक मौसम बहुत खराब रहा और भारी बर्फ़ बारी हुई। मौसम ज्यादा खराब होता देख कई टीम ने वापिसी कर ली। लेकिन हम फिर भी वहीं रुके रहे जब तक मौसम साफ नहीं हुआ। इसी के साथ हमें मौसम की जानकारी मिली कि अगले 3 दिन 30 और 31 मई व 1 जून को मौसम साफ रहेगा। अब हमें निर्णय लेना था कि इन 3 दिनों में से हमने कौन सा दिन ऐवरेस्ट फ़तह के लिए चुनना है। इसके बाद पूरी टीम की सहमति के साथ हमने निर्णय लिया कि 31 मई 2021 को ऐवरेस्ट फ़तह करेंगे औऱ इसके बाद हमने कैम्प-2 जिसकी ऊंचाई 6400 मीटर है अपनी टीम के साथ बात की जिस किसी को भी आराम करना हो तो वो कैम्प-3  जिसकी ऊंचाई 7,300 मीटर है वहाँ रुक सकते हैं । क्योंकि ज्यादातर लोग कैम्प-3 में ही आराम करते हैं। पर मैंने तय किया की कि मैं उन सब से कुछ अलग करूँगा। क्योंकि कैम्प-2 से कैम्प-3 तक पहुंचने में 6 घन्टे लगते है और कैम्प-3 से कैम्प-4 तक पहुँचने में 7 घन्टे लगते है। लेकिन अगले दिन ही Nupse साइड से ग्लेशियर टूटा और नीमा दाई के कैम्प साइड को बहुत नुकसान पहुँचाया । मैं अगले दिन 30 मई 2021 को अपने कैम्प से सुबह 6:30 चलने लगा। रास्ते में चलते हुए मैं अपने कैमरे से वीडियो बना रहा था। तो मैंने देखा कि कल रात को क्या हुआ। उसके बाद मैंने सभी से बात की कि सब ठीक थे। इस ग्लेशियर टूटने से उनका छोटा टेंट जिसमे उनका डाइनिंग हॉल बना हुआ था वो पूरे तरीके से क्षतिग्रस्त हुआ था। ये सब देखने के बाद में आगे की तरफ चलता रहा। अंत में मैं और मेरा शारपा 3 घन्टे में कैम्प-3 पहुँच गये। कैम्प-3 में हम थोड़ी देर रुक के आगे की तरफ निकल गए। जब हम कैम्प-3 से आगे की तरफ जाने लगे तो आगे नीमा दाई की लंबी टीम थी। मैं और मेरा शारपा उन सभी से आगे निकलते है और सबसे आगे नीमा दाई जो कि K2 फ़तह के हीरो है उनसे बात की । उन्होंने ने हमें Good Luck कहा और हम आगे निकल गए। इसी के साथ मैं डेथ ज़ोन 2:30 मिनट में पहुँचा। इसी के साथ मुझे कैम्प-3 से कैम्प-4 तक पहुँचने में 8 घन्टे लगे। हम कैम्प-4 के डेथ ज़ोन 2 बज के 30 मिनट पर पहुँच गए थे। कैम्प-2 से कैम्प-4 तक पहुँचने के लिए हमने कैम्प-3 पर न रुकते हुए सीधे कैम्प-4 गए जिसमें हमें 8 घन्टे लगे। उसके बाद मेरे एक साथी नीरज चौधरी भी अपने शारपा के साथ कैम्प-4 पहुँच गए। इसके बाद हमने कैम्प-4 पर कुछ समय आराम किया और रात को 9:30 बजे हमने दोबरा चढ़ना शुरू कर दिया। लेकिन हमारे साथ आगे कोई और टीम जो कि 100 मीटर तक रास्ता ओपन कर रही थी परंतु वो उसे आगे नहीं जा रहे थे। उन्होंने ने हमें बोला अगर आप आगे जाना चाहते हो तो आपको आगे रास्ता खुद बनाना पड़ेगा। इतना सुनने के बाद मैं व मेरा शारपा और नीरज चौधरी व उनके शारपा ने आगे south balcony तक रास्ता साफ किया। उसके बाद मैं और मेरा शारपा ने चोटी तक पूरा रास्ता साफ किया। 25 से 29 मई तक हुई भारी बर्फबारी से सारी रस्सियां बर्फ़ से ढकी गई थी। जिसकी वजह से मुझे और मेरे शारपा को सारी रस्सियां बर्फ़ से निकालनी पड़ी। जब हम बर्फ़ से रस्सियां निकाल रहे थे तब हमें वहाँ बहुत से पर्वतरोहियो की मृत शरीर मिले जिनको देखकर डर भी लग रहा था। उसके बाद हमने इसी साल जान गवा चुके पर्वतरोही की लाश पड़ी हुई देखी पर हम फिर भी हम आगे बढ़ते रहे और साथ ही साथ बर्फ़ से ढकी रस्सियों को भी बर्फ़ से निकलते रहे । इसके बाद वो मैं 5 बज के 20 मिनट पर अपने शारपा के साथ विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट ऐवरेस्ट पर था। मैंने देखा कि मेरे साथी नीरज चौधरी व उनके शारपा अभी तक ऊपर नहीं पहुँचे । थोड़ी देर हमने उनका इंतजार किया । मुझे बहुत खुशी थी कि 31 मई 2021 मैं ऐवरेस्ट की चोटी पर था।
31 मई 2021 की सुबह 5.20 पर जब हम ऐवरेस्ट की चोटी पर थे तो वहाँ ऐसा लगा कि जैसे हम जन्नत में पहुँच गए हो। ऐवरेस्टर अमित कुमार नेगी जी कहते है कि उन्होंने बहुत समय एवरेस्ट की चोटी पर तस्वीरें ली और विडियो भी बनाई।
ऐवरेस्टर अमित कुमार नेगी जी कहते है कि इस एक पल को पाने के लिए हर साल कितने लोगों को अपनी जान गवानी पड़ती है।
ऐवरेस्टर अमित कुमार  नेगी जी कहते है कि मुझे बहुत खुशी है कि मेरा नाम भी ऐवरेस्टर की सूची में लिया जाएगा।
कुछ देर और ऐवरेस्ट की चोटी में रुकने के बाद हम वापिस कैम्प-2 लौट आये। ऐवरेस्टर अमित कुमार नेगी जी कहते है की वापिस आते हुए मुझे बहुत खुशी थी कि आज मैनें आखिरकार ऐवरेस्ट को फ़तह कर लिया।
इसके बाद अगले दिन हम कैम्प-2 से कुम्बू ग्लेशियर के रास्ते से वापिस बेस कैम्प आ गए। यहाँ पूरी टीम हमारा इंतज़ार कर रही थी। सभी शेरपा और टेक्निकल टीम ने हमें बधाई दी। इसके बाद हम कुछ दिन बेस कैंप में रुके और कुछ दिन बेस कैंप में रुकने के बाद वापिस लुकला एयरपोर्ट से काठमांडू नेपाल पहुँच गए। वहाँ अगले दिन हमारा कोविड टेस्ट हुआ जिसकी रिपोर्ट टेस्ट होने से अगले दिन की सुबह आ गयी ,जो कि नेगिटिव आई। मैं बहुत खुश था अब मैं वापिस अपने घर जा सकता था । हम काठमांडू नेपाल से अगली सुबह IMF न्यू दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
मौसम खराब होने के कारण हम बस से ही न्यू दिल्ली पहुँचे। यहाँ IMF ने हमारा स्वागत बहुत गर्मजोशी से किया और सबको ऐवरेस्ट फ़तह करने की बधाई दी।  This Expedition done during COVID 19 but now my next dream is  Kanchanjangha Expedition  plz help

This is a cause that means a lot to me and I am really looking forward to achieving this goal.


Please lend me your hand with your donations and shares. It would mean the world to me.


Thanks.

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