Help revive the sacrifices of freedom fighters | Milaap
Help revive the sacrifices of freedom fighters
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  • AmirHashmiLive

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    AmirHashmiLive
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    Amir Hashmi

    from Mumbai, Maharashtra

Story

During the Indian independence movement, the Father of the Nation Mahatma Gandhi visited Chhattisgarh in 1920 and 1933, and I am very happy to inform you that a book has been written on this visit and the freedom fighters of Chhattisgarh, Which has been named Johar Gandhi.

Innumerable people of the state of Chhattisgarh took part in the freedom struggle, whose stories have been lost in the pages of history with time. Through the direct interviews of the descendants of those freedom fighters and by collecting and assessing other official written newspapers, documents, books, magazines etc., this book is being presented factually, so that these invaluable stories and freedom fighters to revive the sacrifice.

I, Amir Hashmi, as the author of the book, confirm that this book has not tampered with any part of history, nor has it been written with any hatred, malice or vengeance. It is completely official and based on facts obtained through direct interviews, and upon written notice of any objection or error by the publisher, the book will be published in the next edition with corrections as far as possible.

Therefore, you are requested to participate in the publication of the book Johar Gandhi, by giving your invaluable donation and help in reviving the sacrifice of the freedom fighters.

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भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने 1920 और 1933 में छत्तीसगढ़ का दौरा किया था, और मुझे आपको यह बताते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि, इस यात्रा और छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर केंद्रित एक किताब लिखी गई है, जिसे 'जोहार गांधी' नाम दिया गया हैं.

छत्तीसगढ़ राज्य के असंख्य लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया था, जिनकी कहानियां समय के साथ इतिहास के पन्नों में खो गई हैं। उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वंशजों के प्रत्यक्ष साक्षात्कारों के माध्यम से तथा अन्य आधिकारिक लिखित समाचार पत्रों, दस्तावेजों, पुस्तकों, पत्रिकाओं आदि को एकत्रित व् आंकलन करके इस पुस्तक को तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि इन अमूल्य कथाओं और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को पुनर्जीवित किया जा सके।

मैं, अमीर हाशमी, पुस्तक के लेखक के रूप में यह पुष्टि करता हूँ, कि इस पुस्तक में इतिहास के किसी भी हिस्से के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है, ना ही इसे किसी घृणा, द्वेष या प्रतिशोध भाव के साथ लिखा गया है। यह पूर्ण रूप से आधिकारिक और सीधे साक्षात्कार के माध्यम से मिली जानकारियों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है, तथा प्रकाशक द्वारा किसी भी आपत्ति अथवा त्रुटि की लिखित सूचना पर यथासंभव आगामी संस्करण में पुस्तक को सुधार सहित प्रकाशित किया जावेगा।

अतः आपसे यह अनुरोध है कि 'जोहार गांधी' पुस्तक के प्रकाशन में आप भी भागीदार बनें, अपना अमूल्य दान देकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को पुनर्जीवित करने में सहायता करें।

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