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Let's move forward to give good comfort to the birds

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                                            इन्हें बचना होगा 

कई पक्षियों की प्रजातियां धीरे-धीरे लुप्त हो रही है जो पर्यावरण असंतुलन के खतरे का संकेत दे रहा है। परंतु इस ओर से पर्यावरण व पशुपालन विभाग पूरी तरह से उदासीन है। आज से एक दशक पूर्व तक चिड़ियों की चहचहाने की आवाज से लोग मीठी नींद से जगते थे तथा फौ फटते ही घर आंगन चिड़ियों के कलरव से गुलजार हो जाता था। घर के बूढ़े बुजुर्ग तोता-मैना की कहानी सुनाकर बच्चों के साथ मनोरंजन करते थे परंतु वातावरण में परिवर्तन व विभागीय पदाधिकारियों की उदासीनता की वजह से शिकारियों व बहेलियों के द्वारा इन पक्षियों का शिकार किया जाने लगा। जिस कारण सामा, गोरैया, कर्रा, कठखोदवा, नीलकंठ, पंडुक, परोकी, फूलचूशी, बगूला, कौवा, तोता, मैना आदि की संख्या लगातार कम होती जा रही है तथा कई प्रजातियां तो लुप्त हो चुकी है। इस संबंध में क्षेत्र के पक्षी प्रेमियों ने बताया कि पहले खेत की बुआई के समय सैकड़ों की संख्या में बगुले आते थे तथा पेड़ों के निकट बसंत के आगमन के पूर्व से ही कोयल की कूक मन को मोहित करती थी। मगर समय के बदलते चक्र के कारण पक्षियों का कलरव स्वर अब नहीं सुनाई पड़ता है।
जैसा की आप लोग तो जानते ही हैं की हम लोगो ने इस प्रकृति से इतनी छेड़ छाड़ कर दी है जिसे ठीक कर पाना ना मुमकिन ही है| और इसका खामियाजा हम इंसानों से जादा बेजुबान जानवर और पक्षीयो को भुगतना पड़ रहा है क्योकि हम इन्सान अपनी जरुरतो के हिसाब से वो सभी चीज हासिल कर लेते हैं जिसकी जरुरत हमें होती हैं| लेकिन ये पक्षी और जानवर तो केवल प्रकृति पर ही निर्भर होते हैं 
इतनी तेज धुप और पानी की कमी जिसकी वजह से ये जगहे जगहे अपना दम तोड़ रहे है और हमे आवाज दे रहें है| हमे बचाऔ पर इन पर किसी का ध्यान नही जा रहा है|
लेकिन इंसानियत के नाते हमारा फर्ज बनता हैं की हम इनकी  जादा जादा मदद करे और इन्हें सेफ करे| क्योकि इनका भी उतना ही हक़ हैं इस पृथ्वी पे रहने का जितना हक़ हम इंसानों का है

इस लिए इन लोगो की सेफ्टी को ध्यान में रख कर हमने एक योजना बनाई हैं जिसकी मदद से हम इन पक्षियों की जादा से जादा जान बचा सकते हैं

हम अपनी योजना के तहत इन पक्षियों के लिए इनका एक आशियाना तैयार करेंगे जिसमे इनकी जरूत की वो सभी चीजे मोजूद होंगी| जो की इन्हें चाहिए और उस आशियाने में ये बड़ी आसानी से रह सकते हैं 
और उस आसियाने में रहने पर  इन पर बुरे मौसम का  प्रभाव भी नही पड़ेगा जिससे ऐ फल फुल सकते हैं
एक पक्षी आशियाना बनाने में लगभग 10 लाख रुपयों का खर्चा आ रहा है
हर एक आशियाने के लिए जमीन हमे लेनी होंगी जिसमे 2 से 3 लाख रु का खर्चा आयेंगा
उस आशियाने के निर्माण में लगभग 5 से 6 लाख रु का खर्चा आयेंगा
उस आशियाने के मेंटेनेंस में लगभग 1 लाख का खर्चा आयेंगा
इतना पैसा मेरे पास नही हैं की मै एक भी आशियाने का निर्माण करवा सकु क्योकि मै मिडिल क्लास फैमली से हूँ मेरी इनकम बस उतनी ही है जितने में मै अपना घर चला सकु 
पर मै ऐ जिम्मेदारी उठा सकता हूँ अगर आप लोग हमारी मदद करे तो 
अगर हमने अपनी इस योजना से एक भी बेजुबान जानवर या पक्षी की जान बचा ली तो हम बहोत ही सोभाग्यशाली होंगे
अगर आप हमारे इन बिचारो से सहमत है और हमारे इस योजना के लिए दान करके इसका हिस्सा बनाना चाहते है तो आप अपना व्हात्सप्प नम्बर जरुर दे ताकि हम आपको अपने इस योजना के एक ग्रुप में जोड़ सके जिससे आपको सभी जानकारी हर पल मिलती रहे 

मेरा मोबाईल नम्बर 9919316082  9792934123
धन्यवाद (जय हिन्द जय भारत)
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Goal: Rs.1,000,000

Beneficiary: Abdul info_outline

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