Father Of A Newborn Baby Quits His Job To Save His Brother From Cancer | Milaap
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Father Of A Newborn Baby Quits His Job To Save His Brother From Cancer

"एक तरफ, हमारे परिवार ने मेरी बेटी का स्वागत किया, दूसरी तरफ, हम अपने सबसे छोटे 15 वर्षीय भाई अंकुश को कैंसर में खोने के कगार पर हैं। हमें जिस तरह से खुश होना चाहिए था, हम खुश भी नहीं हो सकते हैं। हमारे लिए अस्पतालों के बीच घूमना बहुत दुखद रहा है। हम में  से कोई भी स्वीकार नहीं कर सकता  था कि कैंसर फिर से अंकुश के जीवन में वापस आ गया है। "
अंकुश को बचाने के लिए 4 साल चले गए हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में व्यर्थ हो गए 
आकाश अंकुश का सबसे बड़ा भाई है और वह अपने भाई की मदद करने के लिए अकेला ही  ज़िम्मेदारी ले रहा है। आकाश को अपने भाई की देखभाल करने के लिए अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी क्योंकि घर पर  कोई और नहीं है जो डॉक्टरों से बात कर सके और वास्तव में समझ सके कि अंकुश की जिंदगी  में क्या चल रहा है.

"मेरे छोटे भाई  जब वो सिर्फ 11 साल का था तो उसे  4 साल की दर्दनाक कीमोथेरेपी मिली । पिछले साल दिवाली से ठीक पहले  उसका ट्रीटमेंट पूरा हो गया और डॉक्टर ने कहा की अंकुश ठीक हो गया है  और हमने सोचा कि अंततः दिवाली  के त्यौहार ने हमारे जीवन को प्रकशित  कर दिया है। लेकिन मुझे क्या पता था  की अंकुश को  दिवाली का आनंद लेने के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। "

किसी ने  नहीं सोचा था की  दीवाली  जो खुशी  अंकुश के जीवन में  लाया है वो बस कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगी 
यद्यपि अंकुश को पिछले साल कैंसर मुक्त घोषित किया गया था, लेकिन उसे  देखभाल की बहुत  आवश्यकता थी और धूल  मिट्टी से दूर रहने की आवश्यकता थी। लेकिन दिवाली में, वह अपने परिवार के साथ बहुत खुश था, उसने बहुत अच्छे से दिवाली मनाई। जनवरी से,उसे अपने शरीर के कई हिस्सों में दर्द की शिकायत शुरू होने लगी । अंकुश को  अपने सर  में गंभीर दर्द होने लगा था जो एक डरावना संकेत था।

"जब अंकुश ने कहा कि उसके घुटने और पैरो दर्द हो रहा  है  तोे हम  ज्यादा परेशान नहीं  थे । लेकिन जब उसने कहा कि उसका सिर  में बहुत तेज़ दर्द हो रहा है , तो हम डर गए I मुझे पता था कि कुछ सही नहीं  हो रहा है । रिपोर्ट्स में भी कुछ नहीं आ रहा था , अब अंकुश से दर्द  सहा नहीं जा रहा था  क्योंकि उसका दर्द उसकी पसलियों  तक पहुंच गया था और वह मुश्किल से अपना सिर ऊपर उठा सकता था। बोन मेरो रिपोर्ट  ने पुष्टि की कि उसको फिर से  रक्त कैंसर  हो गया  है। मेरे मन में यह सब चलने लगा था कि मेरे छोटे भाई के घातक पीड़ाएं वापस आ गई हैं। मैं डर गया था।"



कैंसर का जीवन में दुबारे आने  से  बुरा और  कुछ नहीं हो सकता है और अंकुश की फिर से जिंदगी और मौत से लडाई शुरू हो गयी थी 

जब अंकुश को 2014 में पहली बार रक्त कैंसर का पता चला था , तो उसका हीमोग्लोबिन स्तर 3 तक गिर गया था (13.5-17.5 सामान्य है)। उसे 103 डिग्री के तापमान के साथ हर रात बुखार होता था । जब कैंसर दूसरी बार वापस आया, तो उसने परिवार को बहुत बड़ी मुसीबत में डाल दिया था ।

'कैंसर' शब्द ने हमें पहली बार में ही बिखेर दिया था। हम किसी भी तरह से लड़ने में कामयाब रहे।  लेकिन मेरा भाई  अंकुश बहुत ही हिम्मतवाला  है। हमारे पिता, सकलदेव हर समय उदास रहने लगे । एक समय ऐसा भी आया  जब पिताजी टूट गए हैं और  अंकुश  ही था जो हमें हिम्मत देता की मैं एकदम ठाक हु मुझे कुछ  नहीं हुआ है । हमारी मां, संगीता ने अपने बेटे के जीवन के लिए  प्रार्थना करने के लिए पूजा की कोई जगह नहीं छोड़ी है। वह मंदिरों, चर्चों में जाती है 

लगता है कि आकाश के बलिदान व्यर्थ हो गए हैं


"मैंने अपना काम छोड़ दिया है सिर्फ़ अंकुश को ठीक  करने की जिद में । मेरी बचत भी चली गई है। मेरे पिता इतना ही कमाते है की हमारा घर चल सके । हमने अंकुश की  केमोथेरेपी के केवल 4  चक्रों में 6 लाख रुपये खर्च किए हैं। सिर्फ  बोन मेरो ट्रांसप्लांट ही अब मेरे भाई को बचाने का एकमात्र तरीका है। रिश्तेदारों से भी हमने बहुत कर्जा ले लिया । कोई रास्ता नहीं बचा है I जिससें हम उससे बचा सके । लेकिन उसे छोड़ना हमारे लिए कोई विकल्प नहीं है। "
आप कैसे मदद कर सकते है?
15 वर्षीय अंकुश बहुत दर्द में है क्योंकि वह दूसरी बार कैंसर से लड़ रहा है। उनके परिवार के पास अपने सबसे छोटे बेटे को बचाने के लिए कोई साधन नहीं बचा है। उनके अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक लागत 25 लाख रुपये है।

आप इस अभियान के लिए राशि नीचे  लिखित खाता में  हस्तांतरण भी कर सकते हैं:

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Estimation letter
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7th September 2018
Dear Supporters,

We have some unfortunate news to share with you all today.

Ankush was undergoing dialysis and he was on oxygen support for a very long time. He fought hard but he passed away.

He was having breathing problems, doctors tried their best but could not save him. All the funds raised will be utilised to clear his pending bills.

The family is devastated.

We're really thankful for the love and support which you have shown towards Ankush, May his soul rest in peace.

Regards,
Selva Raj



Dear Supporters,

We have some unfortunate news to share with you all today.

Ankush was undergoing dialysis and he was on oxygen support for a very long time. He fought hard but he passed away.

He was having breathing problems, doctors tried their best but could not save him. All the funds raised will be utilised to clear his pending bills.

The family is devastated.

We're really thankful for the love and support which you have shown towards Ankush, May his soul rest in peace.

Regards,
Selva Raj



4th September 2018
Dear Supporters,

Thank you for the wonderful support you have shown towards Ankush. Here is a quick update on his health.

Currently, he is at the hospital and is on life support system. He is fighting hard for his life as there are infections that must be cured at the earliest.

Request you to please share this campaign and help him to receive the treatment at the earliest.


Regards,
Selva Raj



Dear Supporters,

Thank you for the wonderful support you have shown towards Ankush. Here is a quick update on his health.

Currently, he is at the hospital and is on life support system. He is fighting hard for his life as there are infections that must be cured at the earliest.

Request you to please share this campaign and help him to receive the treatment at the earliest.


Regards,
Selva Raj



Content Disclaimer: The facts and opinions, expressed in this fundraiser page are those of the campaign organiser or users, and not Milaap.
Rs.1,100 raised

Goal: Rs.30,000

Beneficiary: Ankush Kumar info_outline

Supporters (2)

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Anonymous donated Rs.1,000
A
Anonymous donated Rs.100